देवझर-अमली के 156 परिवार विस्थापन को तैयार, पुनर्वास की शर्तें पहले तय करने की मांग

मैनपुर के उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के देवझर-अमली गांव के 156 परिवारों ने स्वेच्छा से विस्थापन के लिए सहमति जताई है। ग्रामीणों ने वन विभाग को आवेदन देकर मांग की है कि विस्थापन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले ग्राम सभा में पुनर्वास की सभी शर्तें तय कर प्रस्ताव पारित किया जाए। ग्रामीणों ने पुनर्वास स्थल पर सड़क, बिजली, पेयजल, स्कूल और आंगनबाड़ी जैसी मूलभूत सुविधाओं की गारंटी के साथ पुनर्वास पैकेज, पात्रता और अलग यूनिट के अधिकार स्पष्ट करने की मांग की है।

Aug 18, 2026 - 14:03
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देवझर-अमली के 156 परिवार विस्थापन को तैयार, पुनर्वास की शर्तें पहले तय करने की मांग

UNITED NEWS OF ASIA. राधे पटेल, गरियाबंद l उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के देवझर-अमली गांव के ग्रामीणों ने स्वेच्छा से विस्थापन के लिए सहमति जताई है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि विस्थापन की प्रक्रिया शुरू करने से पहले पुनर्वास से जुड़ी सभी शर्तें ग्राम सभा में तय की जाएं और उन्हें प्रस्ताव में दर्ज किया जाए। करीब 156 परिवारों और 550 से अधिक आबादी वाले गांव के ग्रामीणों ने ग्राम सभा में सर्वसम्मति से विस्थापन के पक्ष में सहमति जताते हुए वन विभाग को आवेदन सौंपा है।

ग्रामीणों के अनुसार वे पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से देवझर-अमली में निवास कर रहे हैं। गांव वर्ष 1945 में बसाया गया था और वर्तमान में ग्राम पंचायत आमाड़ का आश्रित ग्राम है। शासन द्वारा गांव को राजस्व ग्राम घोषित किए जाने की जानकारी भी ग्रामीणों ने दी है। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी पुश्तैनी जमीन छोड़ने के लिए तैयार हैं, लेकिन विस्थापन की प्रक्रिया सम्मानजनक तरीके से और शासन की पुनर्वास नीति के अनुरूप होनी चाहिए।

ग्रामीणों ने मांग की है कि विस्थापन से पहले ग्राम सभा आयोजित कर सभी परिवारों की सहमति और उनकी मांगों को प्रस्ताव के रूप में दर्ज किया जाए। पुनर्वास स्थल पर सड़क, पुल-पुलिया, बिजली, पेयजल, स्कूल, आंगनबाड़ी और अन्य जरूरी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की शर्त पहले से स्पष्ट की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि केवल गांव को खाली कराकर दूसरी जगह बसाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि नए स्थान पर बेहतर जीवन-यापन के लिए जरूरी सुविधाएं भी सुनिश्चित करनी होंगी।

ग्रामीणों के मुताबिक स्वैच्छिक विस्थापन की स्थिति में पुनर्वास नीति के तहत पात्र परिवारों के लिए दो विकल्प बताए गए हैं। इनमें एक विकल्प के तहत 15 लाख रुपए और दूसरे विकल्प के तहत आवास के साथ 5 एकड़ कृषि भूमि दिए जाने की बात कही गई है। ग्रामीण चाहते हैं कि पुनर्वास पैकेज, पात्रता और परिवारों को मिलने वाले अधिकार ग्राम सभा के प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से दर्ज किए जाएं, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद या असमंजस उत्पन्न न हो।

ग्रामीणों ने परिवार में 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवक-युवती को भी अलग यूनिट मानकर पुनर्वास का लाभ देने की मांग की है। इसके तहत 5 एकड़ कृषि भूमि और 15 लाख रुपए की पात्रता देने की मांग रखी गई है। इसके अलावा विधवा, परित्यक्ता, दिव्यांग और अनाथ व्यक्तियों को भी पात्रता के अनुसार अलग यूनिट मानने की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी परिवार के पास पहले से राजस्व भूमि है और पुनर्वास नीति के तहत एक यूनिट के लिए 5 एकड़ जमीन का प्रावधान है, तो पात्र अतिरिक्त यूनिट के लिए अतिरिक्त भूमि उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

ग्रामीण पुस्तम सिंह मांझी ने बताया कि विस्थापन की चर्चा वे अपने दादा और पिता के समय से सुनते आ रहे हैं। पहले भी पुनर्वास और खेत-खार से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ी थी, लेकिन बाद में मामला रुक गया। अब ग्रामीण स्वेच्छा से विस्थापन के लिए तैयार हैं, लेकिन चाहते हैं कि शासन की पुनर्वास नीति के तहत मिलने वाले सभी अधिकार और सुविधाएं पहले स्पष्ट की जाएं।

उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में विस्थापन को लेकर करीब 17 गांवों में बैठकों का दौर चलने की जानकारी दी गई है। इनमें मोतीपानी, कोदोमाली, नागेश, कोयबा, रक्षापथरा, सोयाबीन, बम्हनी, झोला, भूतबेड़ा, करलाझर, जांगड़ा, पहलीखंड, बरगांव, डूमरपड़ाव, अमली-जुगाड़, आमाड़ और देवझर-अमली सहित अन्य गांव शामिल हैं। इन बैठकों के बाद देवझर-अमली के ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से स्वैच्छिक विस्थापन के लिए सहमति जताई है।

ग्रामीणों ने विस्थापन प्रक्रिया की निगरानी समिति में ग्राम सभा के प्रतिनिधियों को शामिल करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि पुनर्वास स्थल पर मकान निर्माण और अन्य विकास कार्यों की निगरानी में ग्राम सभा की भूमिका सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि कार्यों में अनियमितता की संभावना कम हो और पुनर्वास प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी हो।

देवझर-अमली के ग्रामीणों का कहना है कि वे शासन और वन विभाग के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं। उनकी मुख्य मांग है कि विस्थापन से पहले पुनर्वास की सभी शर्तें ग्राम सभा में स्पष्ट की जाएं, प्रत्येक परिवार की पात्रता तय हो और मूलभूत सुविधाओं की लिखित गारंटी दी जाए। ग्रामीणों के अनुसार इन शर्तों पर ग्राम सभा का प्रस्ताव पारित होने के बाद ही वन विभाग और प्रशासन को पुनर्वास की कार्ययोजना तैयार कर विस्थापन की प्रक्रिया आगे बढ़ानी चाहिए।