दिल्ली में फर्जी खबर पर शिक्षा निदेशालय सख्त, आवारा कुत्तों की गिनती का दावा झूठा

दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने सोशल मीडिया पर वायरल हुए आवारा कुत्तों की गिनती कराने से जुड़ी खबर को फर्जी और भ्रामक बताया। निदेशालय ने दिल्ली पुलिस से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है और लोगों से अफवाहों पर भरोसा न करने की अपील की है।

Jan 2, 2026 - 12:30
 0  15
दिल्ली में फर्जी खबर पर शिक्षा निदेशालय सख्त, आवारा कुत्तों की गिनती का दावा झूठा

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। दिल्ली के शिक्षा निदेशालय (DoE) ने हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई खबर को पूरी तरह भ्रामक और फर्जी करार दिया है, जिसमें दावा किया गया था कि सरकारी स्कूलों के शिक्षकों से आवारा कुत्तों की गिनती कराई जा रही है। निदेशालय ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई आदेश कभी जारी नहीं किया गया और यह अफवाह शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था की छवि को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से फैलाई जा रही है।

निदेशालय ने आम जनता से अपील की है कि वे बिना पुष्टि के इस तरह की अफवाहों पर भरोसा न करें और उन्हें आगे साझा न करें। इसके साथ ही, शिक्षा विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में उन सोशल मीडिया हैंडल्स की सूची भी शामिल की गई है, जिनके माध्यम से यह झूठी जानकारी फैलाई जा रही थी।

DoE निदेशक वेदिथा रेड्डी ने कहा, “शिक्षकों से आवारा कुत्तों की गिनती कराने का कोई आदेश विभाग की ओर से कभी नहीं आया। यह केवल शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की छवि को नुकसान पहुँचाने का जानबूझकर किया गया प्रयास है। इस तरह की झूठी और भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

वेदिथा रेड्डी ने यह भी कहा कि सरकारी स्कूलों के शिक्षक पहले से ही बच्चों की पढ़ाई, देखभाल और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने जैसे अहम दायित्व निभा रहे हैं। ऐसे में उन्हें झूठी खबरों से जोड़ना पूर्णत: गलत और दुर्भावनापूर्ण है। निदेशालय ने दोहराया कि इस तरह की अफवाहें शिक्षकों का मनोबल गिराती हैं और आम जनता को भी भ्रमित करती हैं।

हाल के वर्षों में सोशल मीडिया के माध्यम से फर्जी खबरें फैलाने के कई मामले सामने आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सत्यापन के जानकारी साझा करना समाज में गलत संदेश फैलाता है और प्रशासनिक कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में इस प्रकार की फर्जी और भ्रामक खबरों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए उन्होंने भारतीय न्याय संहिता, 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत कार्रवाई की मांग की है।

निदेशालय की अपील है कि किसी भी खबर को साझा करने से पहले उसकी सत्यता जांचना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उनका संदेश है कि शिक्षा से जुड़े मामलों में झूठी जानकारी फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और शिक्षा व्यवस्था की प्रतिष्ठा को बचाने के लिए कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।