दिल्ली में 11 साल के बच्चे का पहला सफल किडनी ट्रांसप्लांट, मां ने दिया जीवनदान

दिल्ली के वीएमएमसी और सफदरजंग अस्पताल में पहली बार 11 साल के बच्चे का सफल किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। बच्चे की किडनियां फेल हो चुकी थीं। उसकी 35 साल की मां ने किडनी दान की। यह केंद्रीय सरकारी अस्पताल में पहला पेडियाट्रिक किडनी ट्रांसप्लांट माना जा रहा है।

Nov 26, 2025 - 12:31
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दिल्ली में 11 साल के बच्चे का पहला सफल किडनी ट्रांसप्लांट, मां ने दिया जीवनदान

 UNITED NEWS OF ASIA. दिल्ली के वीएमएमसी और सफदरजंग अस्पताल ने पहली बार 11 साल के बच्चे का सफल किडनी ट्रांसप्लांट किया। यह ट्रांसप्लांट सफदरजंग अस्पताल में पहला बाल चिकित्सा किडनी ट्रांसप्लांट होने के साथ ही किसी भी केंद्रीय सरकारी अस्पताल में ऐसा पहला ऑपरेशन है। मरीज 11 साल का बच्चा बाइलैटरल हाइपोडिसप्लास्टिक किडनी नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित था और उसकी दोनों किडनियां फेल हो चुकी थीं।

 उसे गंभीर हालत में सफदरजंग अस्पताल लाया गया था और इलाज के दौरान उसे कार्डियक अरेस्ट भी हुआ। मरीज को तब से नियमित डायलिसिस पर रखा गया था। सर्जिकल ट्रांसप्लांट टीम ने बच्चे का ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया, जिसमें यूरोलॉजी और रीनल ट्रांसप्लांट विभाग के प्रमुख डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. पवन वासुदेवा ने नेतृत्व किया।

बच्चों के किडनी ट्रांसप्लांट में शरीर में बड़े वेसल्स से किडनी जोड़ने और वयस्क किडनी के लिए उचित जगह बनाने जैसी चुनौतीपूर्ण प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। मरीज को किडनी उसकी 35 साल की मां ने दी, जिससे बच्चे की सेहत में तेजी से सुधार हुआ और वह अब डायलिसिस से मुक्त है। गरीब परिवार के लिए यह ऑपरेशन जीवनदान साबित हुआ, क्योंकि निजी अस्पताल में यह प्रक्रिया करीब 15 लाख रुपये की होती।

 अस्पताल ने यह भी बताया कि ट्रांसप्लांट के बाद आवश्यक महंगी इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं बच्चे को मुफ्त उपलब्ध कराई जाएंगी। इस उपलब्धि को अस्पताल और देश की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। ऑपरेशन में बाल रोग (पेडियाट्रिक) टीम का नेतृत्व डॉ. शोभा शर्मा ने किया, उनके साथ डॉ. श्रीनिवासवरदन और विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप के देबता शामिल थे। एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. सुशील ने किया, उनके साथ डॉ. ममता और डॉ. सोनाली थीं। इस सफलता में डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन की कड़ी मेहनत और समर्पण शामिल रहा।