दीपक बैज का सरकार पर हमला, बोले- अपराध छुपाने के लिए थानों में नहीं लिखी जा रही एफआईआर

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य सरकार पर कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अपराध कम दिखाने के लिए थानों में एफआईआर दर्ज नहीं की जा रही, जिससे पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पा रहा है।

Apr 8, 2026 - 12:19
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दीपक बैज का सरकार पर हमला, बोले- अपराध छुपाने के लिए थानों में नहीं लिखी जा रही एफआईआर

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में कानून व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रदेश में बढ़ते अपराधों को छुपाने के लिए पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज नहीं की जा रही है।

रायपुर में पत्रकारों से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार कानून व्यवस्था को संभालने में पूरी तरह विफल रही है और अब अपनी नाकामी छुपाने के लिए अपराधों के आंकड़ों में हेरफेर किया जा रहा है। उनका आरोप है कि पीड़ितों को थानों से वापस लौटा दिया जाता है, जिससे उन्हें न्याय मिलने की संभावना कम हो गई है। उन्होंने कहा कि चोरी, जालसाजी, मारपीट, प्रताड़ना और साइबर ठगी जैसे मामलों में एफआईआर दर्ज कराना अब बेहद कठिन हो गया है।

दीपक बैज ने यह भी कहा कि कानून के अनुसार पुलिस के लिए एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। यदि किसी मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती, तो पीड़ित को न्यायालय जाने की लिखित सलाह दी जानी चाहिए, लेकिन प्रदेश में ऐसा नहीं हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के दबाव में पुलिस टालमटोल कर रही है, जिससे कागजों में अपराध कम दिखाई दे रहे हैं, जबकि वास्तविकता में अपराध बढ़ रहे हैं।

इसके अलावा उन्होंने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की परीक्षाओं को लेकर भी सरकार और आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा के बीच इस बार केवल 51 दिन का अंतर रखा गया है, जबकि पिछले वर्ष यह अंतर 104 दिन का था। उन्होंने इसे परीक्षार्थियों के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि इससे अभ्यर्थियों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है।

शिक्षा के मुद्दे पर भी कांग्रेस ने सरकार को घेरा। दीपक बैज ने कहा कि आरटीई (Right to Education) के तहत गरीब बच्चों का प्रवेश इस साल अधर में लटका हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा फीस भुगतान और वृद्धि नहीं करने के कारण निजी स्कूल बच्चों का एडमिशन लेने से इनकार कर रहे हैं। कांग्रेस ने मांग की कि सरकार तत्काल इस गतिरोध को खत्म करे, ताकि गरीब बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो।

दुर्ग जिले में अवैध अफीम खेती के मामले को लेकर भी उन्होंने सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि निलंबित अधिकारी को जांच पूरी होने से पहले बहाल करना सरकार के रवैये पर सवाल खड़े करता है और इससे जांच की पारदर्शिता पर संदेह उत्पन्न होता है।

अंत में उन्होंने धर्म स्वतंत्रता विधेयक और आरक्षण संशोधन विधेयक पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि नया कानून किसी के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं करेगा और राज्यपाल से लंबित आरक्षण संशोधन विधेयक पर भी जल्द निर्णय लेने की मांग की।

कुल मिलाकर, कांग्रेस ने कानून व्यवस्था, शिक्षा, भर्ती प्रक्रिया और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे मुद्दों को लेकर सरकार पर व्यापक हमला बोला है, जिससे प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट बढ़ती नजर आ रही है।