डबरी बनी रामभजन की समृद्धि का आधार, खेती के साथ मछली पालन से बढ़ी आय
कबीरधाम जिले के ग्राम पोड़ी निवासी रामभजन के लिए विकसित भारत जी राम जी योजना से निर्मित आजीविका डबरी खेती, मछली पालन और रोजगार का नया आधार बनी है। डबरी से सिंचाई सुविधा बढ़ने के साथ अतिरिक्त आय का अवसर मिला है।
UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l
कबीरधाम जिले के जनपद पंचायत बोड़ला अंतर्गत ग्राम पंचायत पोड़ी निवासी रामभजन के जीवन में विकसित भारत जी राम जी योजना के तहत निर्मित आजीविका डबरी ने सकारात्मक बदलाव की राह खोल दी है। करीब 1.80 लाख रुपये की लागत से तैयार डबरी ने उनकी 50 डिसमिल भूमि को सिंचाई सुविधा के साथ आजीविका के नए साधनों से जोड़ दिया है। डबरी बनने से पहले रामभजन मुख्य रूप से वर्षा आधारित खेती पर निर्भर थे। सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण उनकी पूरी जमीन का उपयोग नहीं हो पाता था और खेती से सालाना करीब 8 से 10 हजार रुपये की आय ही हो पाती थी।
ग्राम सभा के माध्यम से रामभजन को योजना और डबरी निर्माण से मिलने वाले आजीविका के अवसरों की जानकारी मिली। इसके बाद उनकी मांग के आधार पर डबरी निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई। डबरी बनने के बाद उनके लिए खेती के साथ अतिरिक्त गतिविधियों से आय बढ़ाने का अवसर तैयार हुआ है।
वर्तमान में डबरी में मछली पालन किया जा रहा है। इसके साथ ही डबरी की मेड़ों पर मौसमी सब्जियों का उत्पादन भी किया जा रहा है। वर्षभर पानी की उपलब्धता से कृषि और मत्स्य पालन दोनों गतिविधियों को बढ़ावा मिला है। इससे रामभजन को प्रतिवर्ष करीब 60 से 70 हजार रुपये तक अतिरिक्त आय प्राप्त होने की संभावना है। इस तरह एक जल संरचना ने उनके परिवार की आजीविका को पहले की तुलना में अधिक विविध और मजबूत बनाने में मदद की है।
डबरी निर्माण के दौरान रामभजन के परिवार सहित अन्य ग्रामीणों को भी रोजगार मिला। निर्माण कार्य में 1.66 लाख रुपये का मजदूरी भुगतान किया गया और कुल 697 मानव दिवस रोजगार का सृजन हुआ। योजना के माध्यम से जहां ग्रामीणों को काम मिला, वहीं स्थायी जल संरचना तैयार होने से भविष्य में आजीविका के अवसर भी मजबूत हुए हैं।
डबरी के माध्यम से आसपास के करीब एक एकड़ क्षेत्र में सिंचाई सुविधा के विस्तार की संभावना है। इससे खेती के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर हो सकती है। साथ ही वर्षा जल के संरक्षण से भूजल स्तर को बढ़ाने और आसपास के हैंडपंपों के रिचार्ज में भी मदद मिलने की उम्मीद है। इस प्रकार डबरी केवल एक खेत के लिए पानी का स्रोत नहीं, बल्कि जल संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाली उपयोगी परिसंपत्ति के रूप में सामने आई है।
रामभजन के लिए आजीविका डबरी अब पानी संग्रह करने वाली संरचना से आगे बढ़कर खेती, मछली पालन, रोजगार और अतिरिक्त आय का आधार बन चुकी है। उनका अनुभव बताता है कि यदि ग्रामीण परिवारों को रोजगार के साथ जल संरक्षण और आजीविका से जुड़ी स्थायी परिसंपत्तियां उपलब्ध कराई जाएं, तो सीमित संसाधनों में भी आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
विकसित भारत जी राम जी योजना के माध्यम से निर्मित यह डबरी ग्रामीण क्षेत्र में जल संरक्षण और आजीविका के बीच बेहतर समन्वय का उदाहरण बन रही है। इससे खेती को सिंचाई का सहारा मिलने के साथ मत्स्य पालन और सब्जी उत्पादन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है। योजना से जुड़े रोजगार और भविष्य में संभावित अतिरिक्त आय के कारण रामभजन के परिवार के लिए आर्थिक स्थिरता की नई उम्मीद बनी है।