स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के अंतर्गत स्वच्छता को व्यवहार परिवर्तन और आजीविका से जोड़ने की पहल शुरू की गई। ग्राम पंचायत ने घर-घर और दुकानों से कचरा संग्रहण की व्यवस्था लागू करने का प्रयास किया, लेकिन शुरुआती दौर में कचरा उठाने के कार्य को लेकर सामाजिक झिझक और धारणा के कारण कोई व्यक्ति इसके लिए आगे नहीं आया। ऐसे में इस व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करना पंचायत के सामने बड़ी चुनौती थी।
जिला पंचायत की ओर से ग्रामीणों को स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और साफ-सफाई से होने वाले स्वास्थ्य लाभों के बारे में जागरूक किया गया। इसके साथ ही प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। प्रशिक्षण के बाद ग्रामीणों की सोच में बदलाव आया और ग्राम के स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने कचरा संग्रहण की जिम्मेदारी उठाने का निर्णय लिया। इसके बाद 1 मई 2024 से ग्राम पंचायत बिरकोना में कचरा संग्रहण का कार्य औपचारिक रूप से शुरू हुआ।
स्व-सहायता समूह की महिलाएं मुख्य मार्ग पर स्थित दुकानों से नियमित रूप से कचरा एकत्र करती हैं। इसके लिए दुकानदारों से 50 रुपये प्रतिमाह शुल्क लिया जाता है। महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ग्राम पंचायत ने 15वें वित्त आयोग से आवश्यक व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए हैं। इनमें मास्क, दस्ताने, चश्मे और रिफ्लेक्टिव जैकेट शामिल हैं। महिलाओं को सुरक्षित तरीके से कचरा संग्रहण और कचरा प्रबंधन का प्रशिक्षण भी दिया गया है।
शुरुआत में सुरक्षा उपकरण पहनकर कचरा संग्रहण करना महिलाओं के लिए नया अनुभव था, लेकिन अब वे इन्हें नियमित रूप से इस्तेमाल करती हैं। सुरक्षा उपकरणों के उपयोग से संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद मिल रही है और महिलाएं सुरक्षित एवं सम्मानजनक तरीके से अपनी आजीविका अर्जित कर रही हैं। इस पहल ने स्वच्छता के कार्य को महिलाओं के लिए आर्थिक गतिविधि के रूप में भी स्थापित किया है।
कचरा संग्रहण व्यवस्था शुरू होने के बाद बिरकोना के चौराहों, सड़कों, स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और बाजार क्षेत्र में स्वच्छता की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। नियमित रूप से कचरा उठाए जाने से खुले में कचरा फैलने की समस्या कम हुई है। इससे गांव का वातावरण पहले की तुलना में अधिक स्वच्छ और व्यवस्थित हुआ है।
ग्राम पंचायत के अनुसार बेहतर स्वच्छता व्यवस्था का ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। गंदगी के कारण होने वाली बीमारियों की संभावना कम होने से उपचार पर होने वाले अनावश्यक खर्च में भी बचत हो रही है। स्वच्छता व्यवस्था ने ग्रामीणों में साफ-सफाई के प्रति जागरूकता बढ़ाने का काम किया है।
बिरकोना की यह पहल बताती है कि यदि स्वच्छता को सामुदायिक भागीदारी और आजीविका से जोड़ा जाए तो इसके परिणाम अधिक प्रभावी हो सकते हैं। जिस काम को कभी सामाजिक झिझक के कारण लोग करने से बचते थे, वही काम आज स्व-सहायता समूह की महिलाएं जिम्मेदारी और आत्मसम्मान के साथ कर रही हैं। कचरा संग्रहण उनके लिए केवल स्वच्छता की जिम्मेदारी नहीं रहा, बल्कि रोजगार, आत्मनिर्भरता और सम्मान का माध्यम बन गया है। यह मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के साथ महिला सशक्तिकरण और स्थानीय आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में उपयोगी उदाहरण प्रस्तुत करता है।