आजादी के दशकों बाद भी टईया नाले पर पुलिया का इंतजार, बारिश में कैद हो जाते हैं विश्राम नगर के ग्रामीण

बलरामपुर जिले के ग्राम पंचायत ब्रजवंधा के आश्रित गांव विश्राम नगर में टईया नाले पर पुलिया नहीं होने से बारिश के दौरान करीब 10 गांवों का संपर्क प्रभावित हो जाता है। ग्रामीणों को स्कूल, राशन, बाजार और इलाज जैसी जरूरी सुविधाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है।

Aug 31, 2026 - 18:39
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आजादी के दशकों बाद भी टईया नाले पर पुलिया का इंतजार, बारिश में कैद हो जाते हैं विश्राम नगर के ग्रामीण

UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l जिले के सुदूर अंचल में बसे ग्राम पंचायत ब्रजवंधा के आश्रित गांव विश्राम नगर के ग्रामीण आजादी के दशकों बाद भी टईया नाले पर पुलिया निर्माण का इंतजार कर रहे हैं। बारिश के मौसम में नाले का जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव के कारण गांव का संपर्क प्रभावित हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया नहीं होने की वजह से आसपास के करीब 10 गांवों के लोगों को हर साल बरसात के दौरान गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों के मुताबिक टईया नाला उनके लिए लंबे समय से बड़ी समस्या बना हुआ है। सामान्य दिनों में किसी तरह आवागमन हो जाता है, लेकिन बारिश शुरू होते ही नाले में पानी बढ़ जाता है। तेज बहाव के कारण लोगों के लिए दूसरी ओर जाना मुश्किल हो जाता है और कई बार गांवों का बाहरी क्षेत्रों से संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से पुलिया निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधियों और नेताओं की ओर से पुलिया निर्माण सहित क्षेत्र के विकास को लेकर कई तरह के आश्वासन दिए जाते हैं। चुनाव समाप्त होने के बाद इन मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारें और जनप्रतिनिधि बदलते रहे, लेकिन टईया नाले की समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है।

बारिश के दिनों में सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को होती है। नाले के दूसरी तरफ उच्च प्राथमिक और हाईस्कूल स्थित हैं। जलस्तर बढ़ने और बहाव तेज होने पर बच्चों के लिए स्कूल तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार बच्चों को जोखिम उठाकर आवागमन करना पड़ता है, जबकि तेज बारिश की स्थिति में उनकी पढ़ाई भी प्रभावित होती है।

राशन और दैनिक जरूरतों को लेकर भी ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। नाला उफान पर होने की स्थिति में लोग हाट-बाजार और सरकारी राशन दुकान तक नहीं पहुंच पाते। इससे जरूरी सामान और खाद्यान्न की उपलब्धता प्रभावित होती है। ग्रामीणों के अनुसार बरसात के दौरान यह समस्या नियमित रूप से सामने आती है और इसका असर पूरे क्षेत्र के लोगों पर पड़ता है।

स्वास्थ्य सुविधा को लेकर स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। यदि बारिश के दौरान किसी ग्रामीण की तबीयत अचानक बिगड़ जाए या किसी मरीज को तत्काल अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़े, तो नाले के कारण आवागमन बाधित होने से समय पर उपचार मिलना मुश्किल हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि आपात स्थिति में यह समस्या उनके लिए बड़ी चिंता का कारण बन जाती है।

समस्या को लेकर परेशान ग्रामीणों ने हाल ही में कलेक्टर को लिखित आवेदन सौंपकर टईया नाले पर जल्द से जल्द पुलिया निर्माण कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थायी समाधान की उम्मीद जताई है। उनका कहना है कि पुलिया बनने से केवल विश्राम नगर ही नहीं, बल्कि आसपास के कई गांवों के लोगों को भी वर्षभर सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सकेगी।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क, पुलिया और आवागमन जैसी मूलभूत सुविधाएं किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए जरूरी हैं। उनका सवाल है कि आखिर कब तक बारिश के मौसम में उन्हें संपर्क टूटने की समस्या झेलनी पड़ेगी। अब ग्रामीणों की नजर जिला प्रशासन और शासन की ओर है कि उनकी वर्षों पुरानी मांग पर कब ठोस कदम उठाया जाता है और टईया नाले पर पुलिया निर्माण का इंतजार कब खत्म होता है।