स्कूल खुल गए, लेकिन सुविधाओं के बिना कैसे होगी पढ़ाई? कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना

प्रदेश कांग्रेस ने नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के बीच राज्य सरकार पर शिक्षा व्यवस्था की अनदेखी का आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि स्कूलों में भवन, शौचालय, पेयजल, पाठ्यपुस्तकों और शिक्षकों की भारी कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

Jun 25, 2026 - 13:17
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स्कूल खुल गए, लेकिन सुविधाओं के बिना कैसे होगी पढ़ाई? कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही प्रदेश कांग्रेस ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि स्कूल तो खुल गए हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। पार्टी ने कहा कि प्रदेश के हजारों सरकारी स्कूल आज भी भवन, शौचालय, पेयजल, पाठ्यपुस्तकों और पर्याप्त शिक्षकों जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने जारी बयान में कहा कि प्रदेश में 57 हजार से अधिक शिक्षकों के पद रिक्त हैं, जबकि 12,560 स्कूलों के भवन जर्जर स्थिति में हैं। ऐसे हालात में बच्चों की सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे संभव होगी, यह बड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर स्कूल भवन इतने खराब हो चुके हैं कि उनमें बच्चों को बैठाकर पढ़ाना जोखिम भरा साबित हो सकता है।

कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि नया सत्र शुरू होने के बावजूद कई स्कूलों तक अभी तक पाठ्यपुस्तकें और विद्यार्थियों के लिए स्कूल ड्रेस नहीं पहुंच सकी हैं। पार्टी का कहना है कि सरकार शाला प्रवेश उत्सव का व्यापक प्रचार कर रही है, लेकिन स्कूलों में पढ़ाई के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने में गंभीरता नहीं दिखा रही।

सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर होती जा रही है। उनके अनुसार युक्तियुक्तकरण के नाम पर पिछले सत्र की तुलना में प्रदेश के 10,463 सरकारी स्कूलों के डायस कोड का विलय कर दिया गया है, जिससे बड़ी संख्या में स्कूलों का स्वतंत्र अस्तित्व समाप्त हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि नए सेटअप के तहत प्राथमिक, माध्यमिक, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्तर पर न्यूनतम पदों में कटौती की गई है और छात्र-शिक्षक अनुपात बढ़ाने के कारण कई रिक्त पद स्वतः समाप्त हो गए।

कांग्रेस ने नियमित शिक्षक भर्ती को लेकर भी सरकार को घेरा। पार्टी का कहना है कि हर महीने बड़ी संख्या में शिक्षक सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लेकिन पिछले डेढ़ वर्ष में नियमित शिक्षकों की नई नियुक्ति नहीं की गई। इससे स्कूलों में शिक्षकों की कमी लगातार बढ़ती जा रही है।

बयान में रायपुर जिले का उदाहरण देते हुए कहा गया कि केवल स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में ही ढाई सौ से अधिक शिक्षकों के पद रिक्त हैं। वहीं नगर निगम के स्कूलों में सहायक शिक्षक ही व्याख्याता की जिम्मेदारी निभाने को मजबूर हैं। कांग्रेस का दावा है कि यदि पूरे प्रदेश के आंकड़ों का विश्लेषण किया जाए तो स्थिति और अधिक चिंताजनक दिखाई देती है।

कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि शिक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए रिक्त पदों पर शीघ्र नियमित भर्ती की जाए, जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत कराई जाए, सभी विद्यार्थियों तक समय पर पाठ्यपुस्तकें और स्कूल ड्रेस पहुंचाई जाए तथा आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि बच्चों की पढ़ाई बिना किसी बाधा के सुचारु रूप से संचालित हो सके।