धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कांग्रेस का बयान, प्रधानमंत्री से भी मांगा इस्तीफा
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रदेश कांग्रेस ने इसे नैतिक निर्णय नहीं बल्कि राजनीतिक मजबूरी बताया है। कांग्रेस ने नीट पेपर लीक मामले का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार पर छात्रों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया और प्रधानमंत्री से भी इस्तीफे की मांग की।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने केंद्र सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। कांग्रेस ने दावा किया है कि यह इस्तीफा नैतिक जिम्मेदारी के आधार पर नहीं बल्कि बढ़ते जनदबाव और राजनीतिक परिस्थितियों के कारण हुआ है। पार्टी ने नीट पेपर लीक प्रकरण को मुद्दा बनाते हुए केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं और प्रधानमंत्री से भी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि यदि सरकार नैतिकता के आधार पर निर्णय लेती, तो नीट पेपर लीक प्रकरण सामने आने के तुरंत बाद ही शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया जाता। उनका आरोप है कि सरकार ने लंबे समय तक इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया और छात्रों की मांगों की अनदेखी की। कांग्रेस का कहना है कि देशभर में छात्रों और युवाओं के लगातार विरोध प्रदर्शन तथा विपक्ष के दबाव के बाद ही यह फैसला लिया गया।
कांग्रेस ने अपने बयान में कहा कि नीट पेपर लीक मामले ने देश के लाखों विद्यार्थियों और उनके परिवारों को प्रभावित किया है। पार्टी के अनुसार प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर उठे सवालों ने छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है। कांग्रेस का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
दीपक बैज ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र और युवा लगातार अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। कांग्रेस का दावा है कि इन आंदोलनों से स्पष्ट होता है कि युवाओं में परीक्षा प्रणाली और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर व्यापक असंतोष है। पार्टी ने कहा कि सरकार को इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और युवाओं का विश्वास बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी कई वर्षों तक कठिन मेहनत करते हैं। ऐसे में यदि परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं या पेपर लीक जैसी घटनाएं होती हैं, तो इसका सीधा असर लाखों छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ता है। कांग्रेस ने दावा किया कि ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ त्वरित और प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
कांग्रेस ने केंद्र सरकार से परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक सुधार लागू करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
प्रदेश कांग्रेस ने अपने बयान में प्रधानमंत्री से भी नैतिक जिम्मेदारी लेने की मांग दोहराते हुए कहा कि सरकार को छात्रों और युवाओं की चिंताओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए। पार्टी का कहना है कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर व्यापक संवाद, जवाबदेही और पारदर्शिता आवश्यक है, ताकि देश के करोड़ों युवाओं का परीक्षा व्यवस्था और सरकारी संस्थाओं पर विश्वास मजबूत बना रहे।