खाद संकट को लेकर कांग्रेस का हमला, सरकार पर किसान विरोधी नीति अपनाने का आरोप

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य में उत्पन्न खाद संकट को सरकार की नीतिगत विफलता बताते हुए इसे "डबल इंजन सरकार निर्मित आपदा" करार दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि किसानों की उत्पादन क्षमता प्रभावित कर धान खरीदी के वादों से बचने के लिए जानबूझकर खाद की कमी पैदा की गई है।

Jun 9, 2026 - 12:49
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खाद संकट को लेकर कांग्रेस का हमला, सरकार पर किसान विरोधी नीति अपनाने का आरोप

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य में खाद की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए सरकार पर किसानों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में लगातार तीसरे वर्ष बोआई के समय खाद संकट की स्थिति बनी हुई है, जिससे किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

धनंजय सिंह ठाकुर ने खाद संकट को "डबल इंजन सरकार निर्मित आपदा" बताते हुए कहा कि वर्ष 2024, 2025 और वर्तमान खरीफ सीजन में भी किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। उनका आरोप है कि यह स्थिति केवल प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम नहीं, बल्कि एक सुनियोजित विफलता है, जिससे किसानों का उत्पादन प्रभावित हो और सरकार को प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी के अपने वादे को पूरा करने में कठिनाई न हो।

कांग्रेस का दावा है कि पिछले खरीफ सीजन में बड़ी संख्या में किसानों से प्रति एकड़ निर्धारित 21 क्विंटल के मुकाबले कम धान की खरीदी की गई, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। पार्टी का कहना है कि किसानों की आय बढ़ाने के दावे करने वाली सरकार की नीतियां व्यवहार में किसान विरोधी साबित हो रही हैं।

धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में सहकारी समितियों के माध्यम से खाद लेने वाले किसानों की संख्या 33 लाख से अधिक है। इसके अतिरिक्त अधिया, रेगहा और निजी दुकानों के माध्यम से खेती करने वाले लाखों किसान भी खाद पर निर्भर हैं। कांग्रेस के अनुसार प्रदेश में खरीफ सीजन के दौरान 15 लाख 75 हजार मीट्रिक टन से अधिक खाद की आवश्यकता होती है, जिसमें यूरिया और डीएपी की मांग सबसे अधिक रहती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सहकारी समितियों में किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं हो रही है, जबकि खुले बाजार में यूरिया और डीएपी अधिक कीमतों पर आसानी से मिल रहे हैं। कांग्रेस ने सरकार से पूछा है कि यदि प्रदेश में खाद की कमी नहीं है, तो खुले बाजार में इसकी कथित कालाबाजारी कैसे हो रही है।

कांग्रेस ने सरकार द्वारा किसानों को रासायनिक खाद के कम उपयोग की सलाह दिए जाने पर भी सवाल उठाया। पार्टी का कहना है कि किसानों को सलाह देने के बजाय उनकी मांग के अनुरूप खाद उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। समय पर खाद नहीं मिलने से फसल उत्पादन प्रभावित होगा, जिसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ेगा।

कांग्रेस ने यह भी कहा कि प्रदेश की लगभग 80 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। ऐसे में खाद संकट केवल किसानों की समस्या नहीं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। पार्टी का आरोप है कि यदि समय रहते खाद की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई तो उत्पादन में गिरावट आएगी, किसान कर्ज के बोझ तले दबेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।

कांग्रेस ने राज्य सरकार से तत्काल खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने, वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने तथा किसानों की समस्याओं का त्वरित समाधान करने की मांग की है।