चितरंगी में भगवान परशुराम जन्मोत्सव पर भव्य ‘भाग्य रैली’, सामाजिक एकता का संदेश
सिंगरौली जिले के चितरंगी क्षेत्र में भगवान परशुराम जन्मोत्सव के अवसर पर भव्य ‘भाग्य रैली’ निकाली गई। रैली में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपरा का संदेश दिया।
UNITED NEWS OF ASIA. आदर्श तिवारी, सिंगरौली l सिंगरौली जिले के चितरंगी क्षेत्र में भगवान परशुराम जन्मोत्सव के अवसर पर भव्य ‘भाग्य रैली’ का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और समाज के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपरा का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया।
रैली की शुरुआत चितरंगी से हुई और यह धरौली, बरहट, धानी एवं कोरसर जैसे विभिन्न गांवों से होकर गुजरी। अंततः रैली खुरमुचा स्थित चतुर्भुज मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक था। जगह-जगह लोगों ने रैली का स्वागत किया और भगवान परशुराम के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
इस आयोजन में भारतीय ब्राह्मण उत्थान महासभा के राष्ट्रीय, प्रदेश और जिला स्तर के पदाधिकारियों की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने भगवान परशुराम के जीवन, उनके आदर्शों और उनके द्वारा स्थापित मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने समाज को संगठित रहने, अपने संस्कारों को बनाए रखने और राष्ट्रहित में कार्य करने का संदेश दिया।
वक्ताओं ने कहा कि भगवान परशुराम केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि न्याय, साहस और धर्म की रक्षा के प्रतीक हैं। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
कार्यक्रम में सुनील तिवारी, महेंद्र प्रसाद मिश्रा, उमाकांत दुबे, दिनेश शुक्ला, संजय तिवारी, शुभम तिवारी, अनिल कुमार पाण्डेय और अमरेंद्र उपाध्याय सहित कई प्रमुख पदाधिकारी और समाजसेवी उपस्थित रहे। इसके अलावा ब्राह्मण समाज के बड़ी संख्या में लोग इस रैली में शामिल हुए, जिससे आयोजन की भव्यता और भी बढ़ गई।
रैली के दौरान अनुशासन और व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया। आयोजकों ने सुनिश्चित किया कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हो। पुलिस और प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा के उचित इंतजाम किए गए थे।
यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने समाज में एकजुटता और भाईचारे का संदेश भी दिया। लोगों ने इसे अपनी संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने का एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
कुल मिलाकर, चितरंगी में आयोजित यह ‘भाग्य रैली’ न केवल श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक बनी, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जागरूकता का भी एक सशक्त माध्यम साबित हुई। ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने और सकारात्मक ऊर्जा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।