विद्युत कंपनी कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन, सामूहिक इस्तीफे का ज्ञापन सौंपा

छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कंपनी के कर्मचारियों और अधिकारियों ने पदोन्नति प्रक्रिया में अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन कर सामूहिक इस्तीफे का ज्ञापन सौंपा। संघ ने हड़ताल और अवकाश पर जाने की चेतावनी भी दी।

Apr 12, 2026 - 11:55
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विद्युत कंपनी कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन, सामूहिक इस्तीफे का ज्ञापन सौंपा

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर।  छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कंपनी में कार्यरत कर्मचारियों और अधिकारियों ने अपने अधिकारों को लेकर बड़ा विरोध प्रदर्शन किया है। आरक्षित वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी संघ के नेतृत्व में प्रदेशभर के विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों में विरोध जताते हुए सामूहिक इस्तीफे का ज्ञापन सौंपा गया। कर्मचारियों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन द्वारा पदोन्नति प्रक्रिया में मनमानी की जा रही है और संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया जा रहा है।

संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा पदोन्नति नियम 2003 के तहत राज्य शासन के सभी विभागों में पदोन्नति प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार की जाती है, लेकिन विद्युत कंपनी में इन नियमों की अनदेखी कर अपने स्तर पर अलग प्रक्रिया अपनाई जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि यह न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि इससे आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों के अधिकारों का हनन भी हो रहा है।

कर्मचारी संगठनों ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशों की भी अनदेखी करते हुए पदोन्नति आदेश जारी किए जा रहे हैं। इससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि राज्य शासन के अधीन आने वाली इस कंपनी का संचालन ऐसे किया जा रहा है, जैसे यह कोई निजी कंपनी हो, जो अपनी सुविधा के अनुसार नियम बना रही हो।

संघ ने यह भी बताया कि आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं, जिनका समाधान अब तक नहीं किया गया है। इससे अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लगभग 45 प्रतिशत कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भी कर्मचारियों को अपनी मांगों को लेकर सामूहिक हड़ताल पर जाना पड़ा था, जिसके बाद प्रबंधन ने आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक उन वादों को पूरा नहीं किया गया।

इसी के विरोध में अब कर्मचारियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए सामूहिक इस्तीफे का ज्ञापन सौंपा है और आगामी दिनों में आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है। संघ ने यह भी घोषणा की है कि 20 तारीख को बड़ी संख्या में कर्मचारी अवकाश पर जाएंगे, जिससे कार्य प्रभावित हो सकता है।

कर्मचारी संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे सामूहिक हड़ताल का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने अन्य संगठनों और कर्मचारियों से भी इस आंदोलन में सहयोग करने की अपील की है, ताकि उनके अधिकारों की रक्षा हो सके।

संघ ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि हड़ताल के दौरान गर्मी के मौसम में बिजली जैसी आवश्यक सेवाएं प्रभावित होती हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी विद्युत कंपनी प्रबंधन की होगी। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जब उनकी बात नहीं सुनी गई, तो उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।

इस पूरे मामले ने राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। अब देखना होगा कि शासन और कंपनी प्रबंधन इस विवाद का समाधान कैसे निकालते हैं और कर्मचारियों की मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है।