माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में वानिकी कार्यों से बढ़ा राजस्व, वन विकास निगम से मिला स्थानीय रोजगार
छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम द्वारा माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में किए जा रहे वानिकी कार्यों से राजस्व वृद्धि के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार मिला है, जिससे सामाजिक-आर्थिक विकास को नई दिशा मिली है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर | वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम द्वारा माओवाद प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में वानिकी कार्यों के माध्यम से सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इन प्रयासों से जहां एक ओर निगम के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, वहीं दूसरी ओर वनांचल क्षेत्रों में निवासरत स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं।
कांकेर जिले के अंतागढ़ परियोजना मंडल अंतर्गत कोयलीबेडा, अंतागढ़, दुर्गुकोंदल एवं मन्हाकाल जैसे अति संवेदनशील क्षेत्रों में सागौन विरलन (थिनिंग), विदोहन तथा वृक्षारोपण के कार्य सफलतापूर्वक संपन्न किए जा रहे हैं। बीते वर्ष इन क्षेत्रों से कुल 4,624.358 घन मीटर काष्ठ एवं जलाऊ लकड़ी का उत्पादन किया गया, जिससे निगम की आय में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। इन गतिविधियों के कारण बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुआ, जिससे पलायन में कमी आई है और ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार हुआ है।
इसी क्रम में औद्योगिक वृक्षारोपण मंडल, जगदलपुर द्वारा बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों—कोण्डागांव एवं फरसगांव—में वृक्षारोपण एवं विदोहन कार्यों को गति दी जा रही है। वर्ष 2024 में यहां से लगभग 1,000 घन मीटर वनोपज का उत्पादन किया गया। साथ ही 94 हेक्टेयर क्षेत्र में 2 लाख 35 हजार सागौन पौधों का रोपण किया गया, जिससे भविष्य में पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक लाभ की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
वर्ष 2025 में अतिक्रमण मुक्त कराए गए वन क्षेत्रों में 76 हेक्टेयर में 1 लाख 90 हजार सागौन तथा 38 हेक्टेयर में 95 हजार नीलगिरी पौधों का रोपण किया गया है। यह प्रयास न केवल वन क्षेत्र विस्तार में सहायक है, बल्कि हरित आवरण बढ़ाकर जलवायु संतुलन में भी योगदान दे रहा है।
सुरक्षा कैंपों की स्थापना से दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में आवागमन सुगम हुआ है, जिससे वानिकी कार्यों को गति मिली है। जहां पहले भय और अस्थिरता का वातावरण था, वहां अब रोजगार, विकास और हरियाली का संदेश पहुंच रहा है।
छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम की यह पहल माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय निवासियों को मुख्यधारा से जोड़ने, आजीविका के स्थायी साधन उपलब्ध कराने और जंगलों के संरक्षण के साथ आर्थिक समृद्धि लाने की दिशा में एक सराहनीय और प्रेरणादायक कदम है।