छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 का अल्पसंख्यक आयोग ने किया स्वागत
छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 के पारित होने पर राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने स्वागत किया है। आयोग ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में पारित धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 को लेकर राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने स्वागत व्यक्त किया है। आयोग का मानना है कि यह विधेयक राज्य में धार्मिक स्वतंत्रता को सुरक्षित रखते हुए सामाजिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा ने इस विधेयक पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य जबरन, प्रलोभन, धोखाधड़ी या दबाव के माध्यम से किए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून समाज में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।
अमरजीत छाबड़ा ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी आस्था और धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता देता है। लेकिन यदि किसी व्यक्ति पर दबाव डालकर या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराया जाता है, तो यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि समाज में असंतुलन और तनाव भी पैदा करता है। इस दृष्टि से यह विधेयक धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक समरसता दोनों को सुरक्षित रखने का कार्य करेगा।
आयोग का यह भी मानना है कि इस कानून के प्रभावी और निष्पक्ष क्रियान्वयन से समाज में सकारात्मक वातावरण बनेगा। पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ लागू किए जाने पर यह विधेयक सभी समुदायों के अधिकारों की रक्षा करेगा और समाज में विश्वास, भाईचारा और सौहार्द को मजबूत करेगा।
अमरजीत छाबड़ा ने विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदाय का उल्लेख करते हुए कहा कि यह विधेयक उन्हें अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को सुरक्षित रखने में सहायता करेगा। उन्होंने कहा कि इससे अल्पसंख्यक समुदाय अपने सामाजिक मूल्यों को बनाए रखते हुए अपनी परंपराओं और संस्कृति को संरक्षित रख सकेगा।
विधेयक को लेकर राज्य में विभिन्न वर्गों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, लेकिन अल्पसंख्यक आयोग ने इसे संतुलित और आवश्यक कदम बताया है। आयोग ने यह भी उम्मीद जताई है कि सरकार इस कानून को लागू करते समय सभी पक्षों का ध्यान रखेगी और किसी भी प्रकार के दुरुपयोग को रोकने के लिए उचित दिशा-निर्देश जारी करेगी।
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 को लेकर राज्य अल्पसंख्यक आयोग का समर्थन यह दर्शाता है कि इसे समाज में संतुलन और शांति बनाए रखने के उद्देश्य से सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में इसके प्रभाव और क्रियान्वयन पर सभी की नजरें बनी रहेंगी।