जनजातीय गौरव समाज के अध्यक्ष प्रेम सिंह ठाकुर और वरिष्ठ नेता विकास मरकाम ने इस विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति और सामाजिक समरसता में निहित है। उन्होंने बताया कि बीते वर्षों में विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में धर्मांतरण से जुड़े कुछ मामले सामने आए, जिनसे सामाजिक संतुलन प्रभावित हुआ। ऐसे में एक स्पष्ट और मजबूत कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
उन्होंने कहा कि यह विधेयक धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है और यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी परिवर्तन पूरी तरह स्वेच्छा से हो। बल, प्रलोभन या अनुचित प्रभाव के माध्यम से किए गए धर्मांतरण पर रोक लगाने के प्रावधान समाज में विश्वास और स्थिरता को मजबूत करेंगे।
सतनामी महासभा के अध्यक्ष राजमहंत एवं डॉ. बसंत अंचल ने भी इस विधेयक का स्वागत करते हुए कहा कि समाज की एकता और सांस्कृतिक निरंतरता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण कई बार व्यक्तिगत विषय से आगे बढ़कर सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करता है, इसलिए इस विषय को संतुलित दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता थी।
उन्होंने कहा कि विधेयक में पूर्व सूचना और विधिक प्रक्रिया जैसे प्रावधान पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करेंगे, जिससे धर्म परिवर्तन निष्पक्ष और स्वैच्छिक होगा। इससे समाज में अनावश्यक विवाद कम होंगे और आपसी विश्वास मजबूत होगा।
मनवा कुर्मी समाज के अध्यक्ष खोडसेराम कश्यप ने इसे समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि यह कानून समाज के कमजोर वर्गों को सुरक्षा प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि जब धर्म परिवर्तन दबाव या प्रलोभन के कारण होता है, तो इससे सामाजिक असंतुलन पैदा होता है। यह विधेयक सुनिश्चित करेगा कि धर्म परिवर्तन केवल व्यक्तिगत आस्था के आधार पर ही हो।
देवांगन समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेश देवांगन ने राज्य सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह विधेयक समाज की दीर्घकालीन अपेक्षाओं के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि इससे पारदर्शिता और उत्तरदायित्व बढ़ेगा तथा सामाजिक तनाव की स्थितियों में कमी आएगी।
सर्व साहू समाज के नेता विनय साहू ने भी इसे सामाजिक संतुलन और सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून किसी धर्म के विरोध में नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक को अपनी आस्था चुनने की स्वतंत्रता को सुरक्षित करता है।
उत्कल गांड़ा महिला महामंच की प्रदेश अध्यक्ष सावित्री जगत ने इस विधेयक को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह गरीबों, महिलाओं और वंचित वर्गों के हितों की रक्षा करेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai के नेतृत्व में लिए गए इस निर्णय के लिए आभार व्यक्त किया।
सभी समाजों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि यह विधेयक व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामाजिक स्थिरता के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे आपसी सम्मान, संवाद और समरसता बनाए रखते हुए इस कानून की भावना के अनुरूप आचरण करें और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत बनाने में सहयोग दें।