छत्तीसगढ़ में ‘मंदिर महासंघ’ का गठन 19 अप्रैल को, मंदिरों की सुरक्षा और प्रबंधन को मिलेगा नया दिशा

रायपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में ‘मंदिर महासंघ छत्तीसगढ़’ की स्थापना की घोषणा की गई। अक्षय तृतीया के दिन 19 अप्रैल को औपचारिक गठन होगा, जिसका उद्देश्य मंदिरों की सुरक्षा, प्रबंधन और संगठन को मजबूत करना है।

Apr 17, 2026 - 12:55
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छत्तीसगढ़ में ‘मंदिर महासंघ’ का गठन 19 अप्रैल को, मंदिरों की सुरक्षा और प्रबंधन को मिलेगा नया दिशा

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर (छत्तीसगढ़)। प्रदेश में मंदिरों की सुरक्षा, सुव्यवस्था और सशक्त प्रबंधन को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। ‘मंदिर महासंघ छत्तीसगढ़’ की स्थापना की घोषणा करते हुए बताया गया कि आगामी 19 अप्रैल को, Akshaya Tritiya के शुभ अवसर पर इसका औपचारिक गठन किया जाएगा।

यह घोषणा Sunil Ghanwat ने रायपुर स्थित प्रेस क्लब में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान की। उन्होंने बताया कि मंदिर महासंघ का उद्देश्य मंदिरों को सशक्त संगठन के रूप में विकसित करना, उनके प्रबंधन और सुरक्षा को बेहतर बनाना तथा उन्हें सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार का केंद्र बनाना है।

उन्होंने जानकारी दी कि अब तक महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में 17,000 से अधिक मंदिर, न्यासी और पुजारी इस महासंघ से जुड़ चुके हैं। यह संगठन मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर उन्हें भक्तों के हाथों में सौंपने की दिशा में कार्य कर रहा है।

पत्रकार वार्ता में उपस्थित Madan Mohan Upadhyay, Pravesh Tiwari, Kamal Biswal, Hemant Kanaskar, Ashish Pareda, Rohit Tiranga तथा Neelkanth Tripathi ने भी इस पहल का समर्थन किया।

सुनील घनवट ने बताया कि महासंघ की प्राथमिकताओं में मंदिरों की पवित्रता बनाए रखने के लिए ‘वस्त्र संहिता’ लागू करना और मंदिर संस्कृति पर किसी भी प्रकार के आघात का संवैधानिक तरीके से विरोध करना शामिल है। साथ ही, संगठन ने सरकार से मांग की है कि मंदिरों और मठों की भूमि पर हो रहे अवैध कब्जों को हटाने के लिए सख्त ‘एंटी लैंड ग्रैबिंग एक्ट’ लागू किया जाए और वक्फ बोर्ड के कब्जे से मंदिर भूमि मुक्त कराई जाए।

इसके अतिरिक्त, भक्तों द्वारा मंदिरों को दान में दी गई भूमि पर लगने वाली स्टांप ड्यूटी को समाप्त करने की भी मांग की गई है। उन्होंने कहा कि इन कदमों से मंदिरों की आर्थिक और प्रशासनिक स्थिति मजबूत होगी।

छत्तीसगढ़ की स्थानीय समस्याओं पर चर्चा करते हुए बताया गया कि प्रदेश में मंदिरों की भूमि पर अवैध अतिक्रमण, अवैध बिक्री और हस्तांतरण जैसी गंभीर समस्याएं सामने आ रही हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए मंदिर महासंघ सक्रिय भूमिका निभाएगा।

इस दिशा में मंदिर न्यासियों, पुजारियों और पुरोहितों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जिससे वे मंदिर प्रबंधन और धार्मिक कार्यों को शास्त्रोक्त पद्धति से बेहतर तरीके से संचालित कर सकें।

रायपुर जिला संयोजक मदन मोहन उपाध्याय ने बताया कि महासंघ द्वारा प्रदेशभर में व्यापक संपर्क अभियान चलाया जा रहा है, जिसके माध्यम से मंदिर प्रतिनिधियों को जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जून माह में एक भव्य ‘मंदिर न्यास परिषद’ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें राज्यभर के मंदिरों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जाएगा।

अंत में मंदिर महासंघ ने प्रदेश के सभी मंदिर न्यासियों, पुजारियों और धर्मप्रेमी नागरिकों से इस अभियान में जुड़ने का आह्वान किया। यह पहल मंदिरों की रक्षा, संगठन और सनातन संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।