छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष सैयद अनवर अली की ओर से 8 सितंबर 2026 को पत्र क्रमांक 389/26 जारी किया गया है। परिवहन मंत्री केदार कश्यप को संबोधित ज्ञापन में महासंघ ने अपनी 9 सूत्रीय मांगों को रखा है। महासंघ के अनुसार मांग पत्र प्रदेश के लगभग सभी मंत्रियों, विधायकों और परिवहन विभाग के अधिकारियों को पत्र व्यवहार के माध्यम से पहले ही दिया जा चुका है। इसके बावजूद मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण अब आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
महासंघ की प्रमुख मांगों में बस किराये में वृद्धि शामिल है। महासंघ का कहना है कि डीजल के दामों में लगातार बढ़ोतरी के कारण बस संचालन की लागत बढ़ गई है। इसे देखते हुए साधारण यात्री बसों के किराये में 75 प्रतिशत और डिलक्स बसों के किराये में 30 प्रतिशत वृद्धि की जानी चाहिए। महासंघ का तर्क है कि मौजूदा किराया बस संचालन से जुड़े बढ़ते खर्च के अनुरूप नहीं है, जिससे बस संचालकों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
महासंघ ने 11 मार्च 2025 को जारी नोटिफिकेशन को रद्द करने की मांग भी रखी है। महासंघ के अनुसार जुलाई-अगस्त 2021 में हुए आंदोलन के बाद 30 सितंबर 2021 को बस किराये में वृद्धि की गई थी, जो लंबे समय तक लागू रही। इसके बाद 11 मार्च 2025 के नए नोटिफिकेशन के माध्यम से किराये में 25 प्रतिशत की कमी कर दी गई। महासंघ का कहना है कि विभाग की ओर से इस बदलाव को हाईकोर्ट के आदेश से जोड़ा गया, जबकि उनके अनुसार न्यायालय का आदेश किराया कम करने के बजाय किराये में चिल्लर से जुड़ी विसंगतियों को दूर करने से संबंधित था।
एक अन्य प्रमुख मांग सभी यात्री बसों के लिए ऑनलाइन परमिट की सुविधा उपलब्ध कराने की है। महासंघ के अनुसार वर्तमान ऑनलाइन पोर्टल पर केवल स्पेयर या आरक्षित बसों के परमिट की प्रक्रिया उपलब्ध है, जबकि स्टेज कैरिज परमिट से संचालित यात्री बसों के लिए ऑनलाइन परमिट की सुविधा नहीं है। महासंघ ने स्टेज कैरिज के रूप में संचालित सभी बसों को भी ऑनलाइन परमिट की सुविधा देने की मांग की है, ताकि परमिट प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी हो सके।
महासंघ ने सरकार को स्पष्ट समयसीमा देते हुए कहा है कि 21 सितंबर तक 9 सूत्रीय मांगों का समाधान नहीं होने पर 22 सितंबर से प्रदेशभर में बस सेवा अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दी जाएगी। इससे प्रदेश के विभिन्न शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच संचालित यात्री परिवहन सेवाओं पर असर पड़ सकता है। अब परिवहन विभाग और सरकार की ओर से इन मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर बस संचालकों और यात्रियों की नजर बनी हुई है।