वन संसाधनों के संरक्षण और सतत प्रबंधन की कार्ययोजना को मंजूरी की मांग, सामुदायिक वन समितियों ने सौंपा ज्ञापन

धमतरी जिले के मारागांव, मड़ेली, मोहेरा, हिर्रीडीह और सातबाहना की सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समितियों ने वन संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन और सतत प्रबंधन के लिए ग्राम सभा द्वारा तैयार कार्ययोजना को मंजूरी देने की मांग की है। समितियों ने कलेक्टर को संयुक्त ज्ञापन सौंपकर जिला स्तरीय समिति से कार्ययोजना का परीक्षण और अनुमोदन कराने के साथ सातबाहना को पृथक ग्राम का दर्जा देने तथा स्वतंत्र ग्राम सभा गठित करने की मांग भी रखी।

Sep 9, 2026 - 11:54
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वन संसाधनों के संरक्षण और सतत प्रबंधन की कार्ययोजना को मंजूरी की मांग, सामुदायिक वन समितियों ने सौंपा ज्ञापन

UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी l सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन और सतत प्रबंधन को लेकर जिले के विभिन्न गांवों की सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समितियों ने प्रशासन के समक्ष अपनी मांग रखी है। मंगलवार को मारागांव, मड़ेली, मोहेरा, हिर्रीडीह और सातबाहना की सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समितियों के प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने कलेक्टर को संयुक्त ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से ग्राम सभा द्वारा तैयार सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन कार्ययोजना को जिला स्तरीय प्रबंधन समिति के समक्ष प्रस्तुत कर आवश्यक परीक्षण, अनुमोदन और आगामी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई।

समितियों का कहना है कि वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत ग्राम सभा और सामुदायिक वन संसाधन अधिकारधारकों को अपने वन संसाधनों की रक्षा, संरक्षण, पुनर्जीवन और प्रबंधन का अधिकार एवं दायित्व प्राप्त है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए संबंधित गांवों की ग्राम सभाओं ने स्थानीय परिस्थितियों, वन संसाधनों की उपलब्धता, संरक्षण की जरूरतों और ग्रामीणों की आजीविका से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखकर सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन की कार्ययोजना तैयार की है। समितियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस कार्ययोजना का जिला स्तर पर आवश्यक परीक्षण कर नियमानुसार अनुमोदन किया जाए, ताकि प्रस्तावित गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा सके।

ज्ञापन में वन संसाधनों के प्रभावी संरक्षण और प्रबंधन के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने की मांग भी की गई है। समितियों के अनुसार वन संरक्षण केवल एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों की भागीदारी, पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय आवश्यकताओं को शामिल करते हुए तैयार की गई योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से वन संसाधनों का संरक्षण और संवर्धन बेहतर तरीके से किया जा सकता है। इसके साथ ही इससे स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसरों को मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है।

संयुक्त ज्ञापन में सातबाहना को पृथक ग्राम के रूप में मान्यता देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। ग्रामीणों ने बताया कि पारा सातबाहना एक अलग और पारंपरिक बस्ती है, जहां समुदाय लंबे समय से निवास करता आ रहा है। यहां सामाजिक, सांस्कृतिक और सामुदायिक गतिविधियां स्थानीय स्तर पर संचालित होती हैं। ग्रामीणों ने सातबाहना के लिए स्वतंत्र ग्राम सभा गठित करने की मांग करते हुए कहा कि इससे स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने और सामुदायिक विकास से जुड़े विषयों में लोगों की भागीदारी अधिक प्रभावी हो सकेगी।

ग्रामीणों ने अपनी मांग के समर्थन में पेसा अधिनियम, छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम और वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों का हवाला दिया। उन्होंने सातबाहना की भौगोलिक स्थिति, जनसंख्या, पारंपरिक निवास, सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान और समुदाय की सामूहिक इच्छा का परीक्षण कर इसे स्वतंत्र ग्राम के रूप में मान्यता देने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय परिस्थितियों का परीक्षण कर नियमानुसार निर्णय लिया जाना चाहिए।

ज्ञापन सौंपने वालों में मनोज साक्षी, प्रमोद कुंजाम, मोहनलाल, राकेश, हीरालाल नेताम, महेंद्र, हेमेंद्र, भुनेश्वरी कश्यप, दुलारी, गेवेंद्र, धनराज, बलीराम सहित अन्य ग्रामीण और समिति के पदाधिकारी शामिल रहे। समितियों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन उनकी मांगों पर आवश्यक परीक्षण कर सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन कार्ययोजना के अनुमोदन और सातबाहना को पृथक ग्राम का दर्जा देने की दिशा में नियमानुसार कार्रवाई करेगा।