अफीम की अवैध खेती पर सियासत तेज, सरकार पर संरक्षण देने का आरोप
छत्तीसगढ़ में अवैध अफीम की खेती को लेकर सियासी विवाद गहराता जा रहा है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि वह दोषियों को बचाने और अवैध खेती को संरक्षण देने का काम कर रही है।
UNITED NEWS OF ASIA.अमृतेश्वर सिंह,रायपुर। छत्तीसगढ़ में अवैध अफीम की खेती का मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने राज्य की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार अफीम की अवैध खेती में संलिप्त लोगों को संरक्षण दे रही है और उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई करने से बच रही है।
रायपुर में जारी प्रेस विज्ञप्ति में सुरेन्द्र वर्मा ने दुर्ग जिले के समोदा गांव का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां बहुचर्चित अवैध अफीम की खेती को मक्का बताने वाली ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी को बिना जांच रिपोर्ट आए ही बहाल कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामला गंभीर था और अधिकारी को निलंबित किया गया था, तो जांच पूरी होने से पहले ही उसे सेवा में वापस क्यों लिया गया? यह निर्णय सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
वर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में कथित रूप से एक भाजपा नेता की संलिप्तता सामने आई थी, लेकिन अब तक न तो उसे पार्टी से निष्कासित किया गया और न ही किसी अधिकारी या कर्मचारी पर कड़ी कार्रवाई हुई। उन्होंने कहा कि केवल निलंबन जैसी औपचारिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाने चाहिए थे।
प्रदेश में सामने आए अन्य मामलों का जिक्र करते हुए वर्मा ने कहा कि नगरी-सिहावा क्षेत्र में बिना मामला दर्ज किए ही सबूत नष्ट कर दिए गए। इसके अलावा बलरामपुर और रायगढ़ जिलों में भी अफीम की अवैध खेती के मामले सामने आए, जिनमें कथित तौर पर भाजपा नेताओं की भूमिका सामने आई। उन्होंने सवाल उठाया कि अफीम से निकाले गए पदार्थ की सप्लाई कहां-कहां तक हुई, इसका अब तक कोई खुलासा क्यों नहीं किया गया।
वर्मा ने सरकार के दावों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब सरकार डिजिटल गिरदावली और जमीन की सटीक माप का दावा करती है, तब इतनी बड़ी मात्रा में अफीम की खेती का पता कैसे नहीं चला? कई स्थानों पर अफीम की फसल को अलग-अलग फसलों जैसे मक्का, गेहूं या सब्जियों के रूप में दिखाया गया, जो प्रशासनिक लापरवाही या मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार दोषियों को बचाने के लिए सबूतों को मिटाने का प्रयास कर रही है, यहां तक कि ट्रैक्टर और बुलडोजर से खेतों को नष्ट करवाया गया। वर्मा के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम दर्शाता है कि सरकार इस मामले को दबाने का प्रयास कर रही है और निष्पक्ष जांच की संभावना पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
अंत में, उन्होंने कहा कि राज्य की जनता अब इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है। अगर सरकार ने जल्द ही स्पष्ट और ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह मुद्दा और भी बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है।