इन एंबुलेंसों में 300 बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) और 70 एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) एंबुलेंस शामिल हैं। इसके साथ ही पहली बार 5 नियोनेटल ALS एंबुलेंस भी शुरू की जा रही हैं, जो विशेष रूप से नवजात शिशुओं की आपात चिकित्सा जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं। यह सेवा नवजात शिशुओं के लिए चलते-फिरते आईसीयू के रूप में काम करेगी और गंभीर स्थिति में उन्हें सुरक्षित रूप से उच्च स्तरीय चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाने में मदद करेगा।
इस पहल का सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों में रहने वाले लोगों को मिलेगा, जहां समय पर चिकित्सा सुविधा पहुंचना अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है। नई एंबुलेंस सेवा के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं, प्रसूति मामलों और गंभीर बीमारियों जैसी आपात स्थितियों में त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का यह कदम राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि हर नागरिक को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो और किसी भी आपात स्थिति में मदद देर से न पहुंचे।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस पहल को लेकर कहा कि किसी भी आपात स्थिति में समय पर चिकित्सा सहायता मिलना जीवन बचाने के लिए बेहद जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों का स्वास्थ्य, सुरक्षा और विश्वास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे, ताकि प्रदेश के हर नागरिक को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।
नई एंबुलेंसों में आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की सुविधा होगी, जिससे मरीजों को मौके पर ही प्राथमिक उपचार मिल सकेगा। इससे अस्पताल पहुंचने से पहले ही कई गंभीर स्थितियों को नियंत्रित किया जा सकेगा।
कुल मिलाकर, 375 नई एंबुलेंस की शुरुआत छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को एक नई दिशा देने वाली पहल है। इससे न केवल आपातकालीन सेवाएं तेज और प्रभावी होंगी, बल्कि आम नागरिकों का भरोसा भी सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर और अधिक मजबूत होगा।