प्रदेश की पहली उत्कृष्ट बैंक सखी बनी खेमेश्वरी, सालाना 2 करोड़ ट्रांजेक्शन कर रचा इतिहास
गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक की खेमेश्वरी तिवारी ने राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जुड़कर बैंक सखी के रूप में असाधारण सफलता हासिल की है। सालाना करीब 2 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन कर वे छत्तीसगढ़ की सबसे उत्कृष्ट बैंक सखी बनी हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. गरियाबंद। छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी मैनपुर ब्लॉक के ग्राम धुरुवागुड़ी निवासी खेमेश्वरी तिवारी ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। राष्ट्रीय आजीविका मिशन (बिहान योजना) से जुड़ने के बाद वे प्रदेश की सबसे अधिक ट्रांजेक्शन करने वाली बैंक सखी बन गई हैं। वर्ष 2025 में लगभग 2 करोड़ रुपये का वार्षिक ट्रांजेक्शन कर उन्होंने प्रदेश की पहली “उत्कृष्ट बैंक सखी” का खिताब हासिल किया है।
अमलीपदर क्लस्टर की पीआरपी निधि साहू ने बताया कि खेमेश्वरी को वर्ष 2019 में आजीविका मिशन से जोड़ा गया था। शुरुआती प्रशिक्षण के बाद उन्हें बीसी सेंटर की आईडी प्रदान की गई और 60 हजार रुपये का ऋण भी दिया गया। शुरुआती दो वर्षों में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने से वे निराश जरूर रहीं, लेकिन मेहनत और लगन के साथ कार्य करती रहीं। इसका परिणाम यह रहा कि बीते दो वित्तीय वर्षों में उन्होंने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया और हर साल लगभग 2 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड बनाया।
खेमेश्वरी बताती हैं कि वे प्रतिमाह करीब 1200 हितग्राहियों को 20 से 25 लाख रुपये तक की नकद राशि का भुगतान करती हैं। वृद्धा पेंशन, किसान समृद्धि योजना, जीवन ज्योति, तेंदूपत्ता संग्राहक भुगतान, छात्रवृत्ति सहित लगभग 12 शासकीय योजनाओं से जुड़े हितग्राहियों को माइक्रो एटीएम के माध्यम से आधार कार्ड और फिंगरप्रिंट स्कैन कर भुगतान किया जाता है। इससे उनकी मासिक आय लगभग 20 हजार रुपये तक पहुंच गई है।
उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा है। वर्ष 2017 में विवाह के बाद दहेज की मांग के चलते उन्हें ससुराल में प्रताड़ना झेलनी पड़ी और अंततः मायके लौटना पड़ा। आर्थिक तंगी के बीच उन्होंने आजीविका मिशन से जुड़ने का निर्णय लिया, जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान जब बैंकिंग सेवाएं सीमित थीं, तब खेमेश्वरी ग्रामीणों के लिए “बैंक वाली दीदी” बनकर उभरीं।
आज भी वे जंगल के भीतर बसे 10 से अधिक गांवों में जाकर बुजुर्ग और बीमार हितग्राहियों तक घर-घर सेवा पहुंचा रही हैं। उनके कार्य में भाई-बहन और पिता का भी सहयोग मिलता है। जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर के अनुसार, खेमेश्वरी को प्रशिक्षण, ऋण और लैपटॉप जैसी सुविधाएं दी गई हैं और भविष्य में आई-स्कैन डिवाइस भी उपलब्ध कराई जाएंगी। खेमेश्वरी आज न केवल गरियाबंद बल्कि पूरे प्रदेश की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।