स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का कहना है कि नेशनल हाईवे जैसे व्यस्त मार्ग पर मवेशियों की मौजूदगी को रोकना और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना बेहद जरूरी है। इसके बावजूद समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है। उनका आरोप है कि टोल प्रबंधन की ओर से हाईवे पर नियमित निगरानी और मवेशियों को हटाने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की जा रही है।
वाहन चालकों के मुताबिक हाईवे पर अचानक मवेशियों के सामने आ जाने से उन्हें तेज गति से वाहन नियंत्रित करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में पीछे या आसपास से आ रहे अन्य वाहनों के साथ टक्कर की आशंका भी बनी रहती है। विशेष रूप से रात और बारिश के दौरान सड़क पर दृश्यता कम होने से जोखिम और बढ़ सकता है।
स्थानीय लोगों ने टोल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप लगाया गया है कि हाईवे की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था से जुड़ी इस गंभीर समस्या पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। टोल प्रबंधन की जिम्मेदारी से जुड़े पवन प्रसान सिंग की कार्यप्रणाली को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित टोल प्रबंधन या अधिकारी का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि किसी भी दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय उससे पहले सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना ज्यादा जरूरी है। हाईवे पर मवेशियों की मौजूदगी लंबे समय तक बनी रही तो किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि सड़क सुरक्षा केवल वाहन चालकों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि संबंधित एजेंसियों और हाईवे प्रबंधन को भी नियमित निगरानी और आवश्यक सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने चाहिए।
वाहन चालकों और स्थानीय नागरिकों ने संबंधित विभाग तथा टोल प्रबंधन से तत्काल कोडार डेम के आसपास हाईवे से मवेशियों को हटाने की मांग की है। इसके साथ ही संवेदनशील स्थानों पर नियमित पेट्रोलिंग, निगरानी और आवश्यक चेतावनी व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई गई है, ताकि वाहन चालकों को समय रहते संभावित खतरे की जानकारी मिल सके।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने और हाईवे पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की है। उनका कहना है कि मवेशियों का हाईवे पर जमावड़ा केवल यातायात संबंधी परेशानी नहीं, बल्कि सीधे तौर पर सड़क सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। समय रहते प्रभावी कदम उठाकर संभावित दुर्घटना को टाला जा सकता है और राहगीरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।