सांसद बृजमोहन अग्रवाल की पहल पर केंद्र का जवाब, छत्तीसगढ़ की औषधि परीक्षण व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर

रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा संसद में उठाए गए प्रश्न पर केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ की आयुष औषधि परीक्षण व्यवस्था की वर्तमान स्थिति स्पष्ट की है। केंद्र ने बताया कि राज्य में 34 आयुष औषधि निरीक्षक कार्यरत हैं और रायपुर में आधुनिक औषधि परीक्षण प्रयोगशाला संचालित है। सांसद ने गुणवत्ता नियंत्रण और नियामकीय व्यवस्था को और सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

Jul 25, 2026 - 11:34
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सांसद बृजमोहन अग्रवाल की पहल पर केंद्र का जवाब, छत्तीसगढ़ की औषधि परीक्षण व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने संसद में छत्तीसगढ़ की औषधि परीक्षण व्यवस्था, आयुष क्षेत्र के विकास और हर्बल उद्योग को मजबूत बनाने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। सांसद की पहल पर केंद्र सरकार ने लोकसभा में जवाब देते हुए राज्य की वर्तमान औषधि परीक्षण व्यवस्था और नियामकीय ढांचे की स्थिति स्पष्ट की है। सांसद का कहना है कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध वन संपदा और आयुर्वेदिक विरासत को देखते हुए राज्य में औषधि गुणवत्ता परीक्षण की आधुनिक व्यवस्था विकसित करना समय की आवश्यकता है।

संसद के वर्तमान सत्र के दौरान बृजमोहन अग्रवाल ने प्रश्न के माध्यम से केंद्र सरकार का ध्यान छत्तीसगढ़ सहित उन राज्यों की ओर आकर्षित किया, जहां आयुष औषधियों की गुणवत्ता जांच, दवा निरीक्षकों की उपलब्धता और परीक्षण प्रयोगशालाओं के आधुनिकीकरण की आवश्यकता महसूस की जा रही है। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या सरकार राज्य में दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं को आधुनिक बनाने, पर्याप्त दवा निरीक्षकों की नियुक्ति करने तथा औषधि उद्योग से जुड़े लाइसेंस और प्रमाणन की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठा रही है।

लोकसभा में दिए गए जवाब में केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि छत्तीसगढ़ में वर्तमान समय में 34 आयुष औषधि निरीक्षक कार्यरत हैं। साथ ही रायपुर में आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित औषधि परीक्षण प्रयोगशाला संचालित की जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में नियामकीय व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार राज्य शासन तथा संबंधित हितधारकों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है।

इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ औषधीय पौधों, आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की दृष्टि से देश के महत्वपूर्ण राज्यों में शामिल है। यहां उपलब्ध प्राकृतिक संसाधन और औषधीय वनस्पतियां आयुष उद्योग के विकास की अपार संभावनाएं प्रस्तुत करती हैं। ऐसे में औषधियों की गुणवत्ता जांच, परीक्षण प्रणाली और नियामकीय ढांचे को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश के आयुर्वेदिक एवं हर्बल उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाना है तो आधुनिक परीक्षण प्रयोगशालाओं, उन्नत तकनीक और पारदर्शी प्रमाणन प्रणाली को मजबूत करना होगा। इससे न केवल उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ेगा बल्कि स्थानीय उद्यमियों, लघु उद्योगों, वनोपज संग्राहकों और औषधि निर्माताओं को भी व्यापक लाभ मिलेगा।

बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि संसद के माध्यम से वे लगातार ऐसे मुद्दे उठा रहे हैं जिनका सीधा लाभ छत्तीसगढ़ की जनता, आयुष चिकित्सकों, औषधि निर्माताओं, हर्बल उद्योग से जुड़े उद्यमियों और युवाओं को मिल सके। उनका मानना है कि गुणवत्तापूर्ण परीक्षण व्यवस्था और मजबूत नियामकीय प्रणाली राज्य में निवेश, रोजगार और आयुष आधारित उद्योगों के विस्तार को भी नई दिशा देगी।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की औषधि परीक्षण एवं गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी। इससे प्रदेश आयुष आधारित उद्योगों, औषधि निर्माण और हर्बल उत्पादों के क्षेत्र में देशभर में एक मजबूत पहचान स्थापित करेगा तथा स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग कर आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।