सेक्स सीडी कांड में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को बड़ा झटका, सेशन कोर्ट ने ट्रायल दोबारा चलाने का दिया आदेश

छत्तीसगढ़ के चर्चित सेक्स सीडी कांड मामले में सेशन कोर्ट ने लोअर कोर्ट के आदेश को पलटते हुए दोबारा ट्रायल चलाने का निर्देश दिया है। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित पांच आरोपी हैं। कोर्ट ने भूपेश बघेल को ट्रायल के दौरान नियमित रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।

Jan 25, 2026 - 14:05
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सेक्स सीडी कांड में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को बड़ा झटका, सेशन कोर्ट ने ट्रायल दोबारा चलाने का दिया आदेश

UNITED NEWS OF ASIA.अमृतेश्वर सिंह, रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित सेक्स सीडी कांड मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को एक बड़ा कानूनी झटका लगा है। सेशन कोर्ट ने लोअर कोर्ट के उस आदेश को बदल दिया है, जिसमें आरोपियों को राहत दी गई थी, और अब इस मामले में पुनः ट्रायल चलाने का आदेश दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद एक बार फिर यह मामला राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

सेशन कोर्ट के आदेश के अनुसार, इस प्रकरण में अब नियमित रूप से सुनवाई होगी और सभी आरोपियों को ट्रायल का सामना करना पड़ेगा। कोर्ट ने विशेष रूप से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को निर्देश दिया है कि वे ट्रायल के दौरान नियमित रूप से न्यायालय में उपस्थित रहें। इस मामले में भूपेश बघेल के साथ विनोद वर्मा, कैलाश मुरारका, विजय भाटिया और विजय पांडेय आरोपी हैं।

यह मामला वर्ष 2017–18 का है, जब तत्कालीन विधानसभा चुनाव से पहले एक कथित अश्लील सीडी सामने आई थी। आरोप है कि इस सीडी के माध्यम से तत्कालीन मंत्री और बीजेपी विधायक राजेश मूणत की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया था। मामले में ब्लैकमेलिंग और अश्लील वीडियो के जरिए पैसे की मांग करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।

बीजेपी नेता प्रकाश बजाज ने 26 अक्टूबर 2017 को रायपुर के पंडरी थाने में इस संबंध में एफआईआर दर्ज कराई थी। एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि कुछ लोगों द्वारा एक कथित सेक्स सीडी के नाम पर ब्लैकमेल कर पैसों की मांग की जा रही थी। जांच के दौरान पुलिस ने वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा को गिरफ्तार किया था, जबकि 2018 में भूपेश बघेल की भी इस मामले में गिरफ्तारी हुई थी।

लोअर कोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए आदेश को चुनौती देते हुए इस मामले को सेशन कोर्ट में ले जाया गया था। अब सेशन कोर्ट ने उस आदेश को पलटते हुए स्पष्ट किया है कि मामले के तथ्यों और साक्ष्यों की विस्तृत जांच आवश्यक है, जिसके लिए ट्रायल का पुनः संचालन जरूरी है।

सेशन कोर्ट के इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल इस फैसले को कानून की जीत बता रहे हैं, वहीं कांग्रेस खेमे में इसे राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़कर देखा जा रहा है। अब आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।