भगवान बलराम जयंती को कृषि और किसानों से जोड़कर देखा जाता है। इसी अवसर को ध्यान में रखते हुए आयोजित कृषक संगोष्ठी में खेती-किसानी से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए कृषि पद्धतियों में आवश्यक बदलाव लाने के लिए सलाह दी गई। संगोष्ठी में इस बात पर जोर दिया गया कि खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए किसान उपलब्ध संसाधनों और वैज्ञानिक सलाह का बेहतर उपयोग करें।
कार्यक्रम में उपसंचालक कृषि मोरिश नाथ, परियोजना संचालक आत्मा धीरज ठाकुर, भारतीय किसान संघ के प्रांतीय महामंत्री मेरसिंग चौधरी, जिला अध्यक्ष रामराव लाड़े, सदस्य राहुल वसूले, जनपद सदस्य रोशनी मर्सकोले, सरपंच रामकृष्ण बट्टी और उपसरपंच गजानंद पवार सहित अनेक प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इनके साथ अनुविभागीय कृषि अधिकारी परासिया प्रमोद सिंह उट्टी, सहायक संचालक कृषि छिंदवाड़ा दीपक चौरसिया, अनुविभागीय कृषि अधिकारी छिंदवाड़ा एनके पटवारी, सहायक परियोजना संचालक आत्मा प्राची कौतू और सहायक अभियांत्रिकी अश्विनी सिंह भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
कृषि विभाग के मैदानी अमले की भी संगोष्ठी में सक्रिय उपस्थिति रही। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी परासिया एसपी डेहरिया, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी रमेश पवार, बीटीएम अमित बघेल, कृषि विकास अधिकारी जीएस वाडिवा, आरसी सलाम सहित विभाग से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने किसानों के साथ कृषि क्षेत्र से जुड़े विषयों पर संवाद किया और खेती में बेहतर पद्धतियों को अपनाने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया।
संगोष्ठी में किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को ऐसी कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना रहा, जिससे खेती में प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग हो और कृषि कार्य को अधिक टिकाऊ बनाया जा सके। कृषि विभाग की ओर से किसानों को खेती से संबंधित जानकारी और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की बात भी सामने आई।
कार्यक्रम में प्रगतिशील किसानों की भी सहभागिता रही। विष्णु पवार, गुरु प्रसाद पवार, जयपाल पवार, रामकृष्ण पवार, गुरुदयाल माहौरे और वीरन यादव सहित क्षेत्र के किसान संगोष्ठी में उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में महिला और पुरुष किसानों की भागीदारी ने कार्यक्रम को व्यापक स्वरूप दिया।
भगवान बलराम जयंती के अवसर पर आयोजित यह कृषक संगोष्ठी किसानों और कृषि विभाग के बीच संवाद का माध्यम बनी। कार्यक्रम के जरिए किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती के प्रति जागरूक करने के साथ कृषि क्षेत्र में बेहतर और टिकाऊ पद्धतियों को अपनाने का संदेश दिया गया। कृषि विभाग और आत्मा परियोजना की ओर से किसानों को आगे भी आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास जारी रखने की बात कही गई।