बेलरगांव स्वास्थ्य शिविर: 143 बच्चों की जांच, कुपोषित बच्चों को NRC रेफर

धमतरी जिले के बेलरगांव में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में 143 बच्चों की जांच की गई। गंभीर व मध्यम कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा गया और अभिभावकों को पोषण संबंधी महत्वपूर्ण सलाह दी गई।

Apr 24, 2026 - 16:24
 0  3
बेलरगांव स्वास्थ्य शिविर: 143 बच्चों की जांच, कुपोषित बच्चों को NRC रेफर

UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी l छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के बेलरगांव में एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य पहल के तहत व्यापक स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया। कलेक्टर के दिशा-निर्देशन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के सहयोग से आयोजित इस शिविर में स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग ने संयुक्त रूप से भागीदारी निभाई। शिविर का उद्देश्य आंगनबाड़ियों और मोबाइल क्रेच ‘लइका घर’ में पंजीकृत बच्चों, विशेषकर कुपोषित और एनीमिया से प्रभावित बच्चों की पहचान कर उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराना था।

इस शिविर में कुल 143 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि रही। जिला टीकाकरण अधिकारी और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. जे.पी. दीवान ने 43 विशेष चिन्हांकित बच्चों की गहन जांच की। जांच के दौरान 37 बच्चे गंभीर कुपोषण और 59 बच्चे मध्यम कुपोषण से ग्रसित पाए गए। इन सभी बच्चों को बेहतर उपचार और निगरानी के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र नगरी में रेफर किया गया।

शिविर में स्वास्थ्य जांच के साथ-साथ रक्त परीक्षण भी किया गया। कुल 69 बच्चों का हीमोग्लोबिन परीक्षण हुआ, जिसमें 10 बच्चे एनीमिया से पीड़ित पाए गए। इसके अलावा 13 बच्चों का रैंडम ब्लड शुगर (RBS) टेस्ट किया गया, जो सामान्य पाया गया। यह आंकड़े क्षेत्र में बच्चों के स्वास्थ्य की स्थिति को समझने और आगे की रणनीति बनाने में सहायक होंगे।

आयुष विभाग के सहयोग से 136 बच्चों को ‘स्वर्ण प्राशन’ भी कराया गया, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया। यह पारंपरिक पद्धति बच्चों की इम्युनिटी को मजबूत करने में सहायक मानी जाती है।

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. जे.पी. दीवान ने अभिभावकों को जागरूक करते हुए कहा कि कुपोषण का मुख्य कारण बच्चों को समय पर और संतुलित आहार न मिलना है। उन्होंने सलाह दी कि बच्चों को दिन में 6 से 7 बार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भोजन दिया जाए और घर पर ही पौष्टिक खाद्य पदार्थ जैसे पंजीरी, मूंगफली के लड्डू आदि बनाकर खिलाया जाए। उन्होंने विशेष रूप से बाहर मिलने वाले पैकेट बंद खाद्य पदार्थों से बचने की अपील की।

बीएमओ नगरी डॉ. डी.एन. सोम ने बताया कि चिन्हांकित बच्चों की नियमित निगरानी महिला एवं बाल विकास विभाग और मोबाइल क्रेच के माध्यम से की जाएगी, ताकि उनकी सेहत में निरंतर सुधार सुनिश्चित किया जा सके।

इस शिविर की सफलता में डॉ. जय किशन नाग, डॉ. तरुण देवगन सहित कई चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

कुल मिलाकर, यह स्वास्थ्य शिविर न केवल बच्चों के स्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह जागरूकता बढ़ाने और कुपोषण के खिलाफ प्रभावी लड़ाई का भी उदाहरण प्रस्तुत करता है।