बैटरी चालित मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल बनी संबल, दिव्यांग हरिचंद पटेल बने आत्मनिर्भर
छत्तीसगढ़ शासन की समाज कल्याण योजनाओं के तहत दिव्यांग हरिचंद पटेल को बैटरी चालित मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल प्रदान की गई, जिससे उन्होंने किराना दुकान खोलकर आत्मनिर्भर जीवन की शुरुआत की।
UNITED NEWS OF ASIA.अमृतेश्वर सिंह, रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन का समाज कल्याण विभाग दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की दिशा में लगातार प्रभावी पहल कर रहा है। शासन की योजनाएं अब केवल सहायता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने का सशक्त माध्यम बन रही हैं। इसका जीवंत उदाहरण कबीरधाम जिले के जनपद पंचायत कवर्धा अंतर्गत ग्राम गांगचुवा (सिंघनपुरी) निवासी दिव्यांग हरिचंद पटेल हैं, जिनके जीवन में बैटरी चालित मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल ने नई उम्मीद जगाई है।
हरिचंद पटेल एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसमें उनका बायां पैर कट गया। इस दुर्घटना के बाद उनका सामान्य जीवन और आजीविका दोनों प्रभावित हो गईं। सीमित संसाधनों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच उनके लिए दैनिक आवागमन और रोजगार के अवसर लगभग असंभव हो गए थे।
उपचार के दौरान जिला अस्पताल से उन्हें दिव्यांगता प्रमाण पत्र की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने समाज कल्याण विभाग में बैटरी चालित मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल के लिए आवेदन किया। पात्रता की जांच के पश्चात विभाग द्वारा उन्हें यह सुविधा प्रदान की गई।
मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल मिलने से पटेल की जिंदगी में बड़ा बदलाव आया। अब उन्हें दूसरों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं रही। इस सुविधा का उपयोग करते हुए उन्होंने अपने गांव में किराना दुकान की शुरुआत की। ट्राइसाइकिल की मदद से वे स्वयं सामान खरीदकर लाने-ले जाने का कार्य कर रहे हैं और ग्राहकों तक सेवाएं पहुंचा रहे हैं।
आज हरिचंद पटेल न केवल अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं, बल्कि समाज में सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन जी रहे हैं। उनका कहना है कि यदि यह सुविधा समय पर न मिलती, तो उनका संघर्ष और अधिक कठिन हो जाता।
पटेल ने इस सहयोग के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शासन की यह योजना दिव्यांगजनों के लिए केवल एक साधन नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और स्वावलंबन की नई राह है।
समाज कल्याण विभाग की यह पहल स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि यदि सही समय पर सही सहायता मिले, तो दिव्यांगजन भी आत्मनिर्भर बनकर समाज की मुख्यधारा में मजबूती से आगे बढ़ सकते हैं।