बंद पड़ी गांव गंगा योजना से सूखे तालाबों की बढ़ी परेशानी
राज्य गठन के शुरुआती दौर में वर्ष 2000 में शुरू की गई गांव गंगा योजना का उद्देश्य गर्मी के दिनों में सूखने वाले गांवों के तालाबों को बोरवेल के जरिए पानी से भरना था। इससे ग्रामीणों की निस्तारी जरूरतें पूरी होती थीं और मवेशियों के लिए भी पानी उपलब्ध रहता था।
बस्तर में योजना के तहत लगाए गए करीब 200 बोरवेल लंबे समय से बंद बताए जा रहे हैं। कई स्थानों पर मोटर और उपकरण खराब हैं, जबकि कुछ जगह सामान चोरी होने की जानकारी सामने आई है। योजना के बंद होने का असर सीधे गांवों के तालाबों और ग्रामीण जीवन पर पड़ रहा है।
तालाबों में पानी की कमी से मत्स्य पालन करने वाले लोगों को भी नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि बंद पड़े बोरवेल की मरम्मत कर योजना को फिर से शुरू किया जाए, ताकि पुरानी व्यवस्था का उपयोग कर गांवों की पानी संबंधी समस्या दूर की जा सके।
बारिश की कमी से किसानों की बढ़ी चिंता
बस्तर में मानसून की स्थिति इस बार किसानों की उम्मीदों के मुताबिक नहीं रही। अब तक जिले में 627.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य बारिश 826.5 मिलीमीटर मानी जाती है। इस तरह करीब 199.1 मिलीमीटर यानी लगभग 24 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है।
बारिश के बीच लंबे अंतराल के कारण खेतों में नमी बनाए रखना किसानों के लिए चुनौती बन रहा है। खासकर धान की फसल के लिए पर्याप्त पानी की जरूरत होती है। किसानों को अब आने वाले भादो महीने में अच्छी बारिश की उम्मीद है। यदि बारिश का अंतराल बढ़ता है तो खरीफ फसल की लागत और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
कुत्तों से बचकर कलेक्ट्रेट पहुंचा माउस डियर
दंतेवाड़ा कलेक्ट्रेट परिसर में एक माउस डियर के पहुंचने से लोगों में कौतूहल मच गया। बताया गया कि कुत्तों के पीछा करने से घबराया वन्यजीव आबादी क्षेत्र में पहुंच गया था। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और माउस डियर को सुरक्षित रेस्क्यू किया।
वन विभाग ने पशु चिकित्सा अधिकारी से उसका स्वास्थ्य परीक्षण कराया। स्वस्थ पाए जाने के बाद उसे बचेली क्षेत्र के उपयुक्त प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया। वन विभाग के अनुसार माउस डियर संरक्षित वन्यजीव है, इसलिए आबादी क्षेत्र में मिलने पर उसे सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू करना जरूरी है।
जर्जर भवन का छज्जा गिरने से छात्र घायल
बस्तर में सुभाष चौक स्थित जर्जर आंगनबाड़ी भवन का छज्जा गिरने से स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल में कक्षा आठवीं के एक छात्र के घायल होने की जानकारी सामने आई है। हादसे में छात्र के हाथ और पैर में गंभीर चोटें आईं। इलाज में करीब ढाई लाख रुपये खर्च होने की बात सामने आई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार भवन लंबे समय से जर्जर स्थिति में था। हादसे के बाद लोगों ने क्षेत्र के सभी पुराने और जर्जर सरकारी भवनों का सुरक्षा निरीक्षण कराने की मांग की है। घायल छात्र के परिवार ने भी इलाज के खर्च को देखते हुए प्रशासन से आर्थिक सहायता की मांग की है।
एकलव्य स्कूल में मूलभूत सुविधाओं पर सवाल
बीजापुर के भैरमगढ़ स्थित पीएमश्री एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में विद्यार्थियों की सुविधाओं को लेकर सवाल उठे हैं। परिजनों के अनुसार बालक और बालिका छात्रावास में करीब 220-220 विद्यार्थी रह रहे हैं, जबकि प्रत्येक छात्रावास में दो-दो शौचालय होने की बात कही गई है। इनमें कई के खराब होने की शिकायत भी सामने आई है।
बालिका छात्रावास में सैनिटरी पैड की नियमित उपलब्धता नहीं होने की शिकायत भी परिजनों ने की है। सर्व आदिवासी समाज ने विद्यार्थियों की समस्याओं का जल्द समाधान कराने की मांग की है। सहायक आयुक्त ने शिकायतों की जांच कराने और आवश्यक सुधार की बात कही है।
दूरदर्शन स्टूडियो के सीमित प्रसारण पर सवाल
जगदलपुर के धरमपुरा स्थित दूरदर्शन स्टूडियो में बस्तर की स्थानीय संस्कृति और भाषाओं से जुड़े कार्यक्रम तैयार किए जाते रहे हैं। हल्बी, भतरी, गोंडी, मुरिया, माड़िया, छत्तीसगढ़ी और हिंदी में कार्यक्रमों के जरिए स्थानीय कलाकारों को मंच मिलता रहा है।
हालांकि अब प्रसारण का समय सीमित होने से कलाकारों और स्थानीय लोगों में चिंता है। कर्मचारियों की कमी भी स्टूडियो के कामकाज को प्रभावित कर रही है। स्थानीय कलाकारों की मांग है कि बस्तर की कला, संस्कृति और स्थानीय भाषाओं से जुड़े कार्यक्रमों का नियमित प्रसारण बढ़ाया जाए, ताकि क्षेत्र की प्रतिभाओं को बेहतर मंच मिल सके।