बलरामपुर: फर्जी दस्तावेजों पर नियुक्त चार आंगनबाड़ी सहायिकाओं की नियुक्ति रद्द, कलेक्टर का सख्त फैसला
बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ विकासखंड में फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर नियुक्त चार आंगनबाड़ी सहायिकाओं की सेवाएं कलेक्टर राजेंद्र कटारा ने निरस्त कर दी हैं। इस फैसले से पात्र अभ्यर्थियों को न्याय मिला है।
UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर | रामानुजगंज जिले के शंकरगढ़ विकासखंड में फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर की गई आंगनबाड़ी सहायिका पद की नियुक्तियों को जिला प्रशासन ने रद्द कर दिया है। कलेक्टर राजेंद्र कटारा ने अपील प्रकरण की सुनवाई के बाद सख्त निर्णय लेते हुए चार महिलाओं की नियुक्ति को निरस्त करने का आदेश जारी किया है। इस फैसले को प्रशासनिक सख्ती और पारदर्शिता की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार शंकरगढ़ विकासखंड अंतर्गत बहेराटोली, कटहरपारा, धाजापाठ और डूमरपानी आंगनबाड़ी केंद्रों में नियुक्त अरमाना, रिजवाना, प्रियंका यादव और सुशीला सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि संबंधित महिलाओं ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आंगनबाड़ी सहायिका पद प्राप्त किया है, जिससे वास्तविक पात्र अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा जांच कराई गई। जांच में यह तथ्य सामने आया कि संबंधित नियुक्तियों में दस्तावेजों की सत्यता संदिग्ध पाई गई और नियुक्ति प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन किया गया। इसके बाद अपील प्रकरण के तहत मामले की विस्तृत सुनवाई की गई।
सभी पक्षों को सुनने के बाद कलेक्टर राजेंद्र कटारा ने चारों महिलाओं की नियुक्ति को निरस्त करने का आदेश जारी किया। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि शासकीय योजनाओं और पदों पर नियुक्ति में किसी भी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी जैसी महत्वपूर्ण सेवा में ईमानदारी और पात्रता सर्वोपरि है।
इस निर्णय के बाद उन अभ्यर्थियों को न्याय मिला है, जो नियमों के तहत पात्र होने के बावजूद चयन से वंचित रह गए थे। प्रशासनिक कार्रवाई से यह संदेश भी गया है कि यदि कोई व्यक्ति फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी या अर्धशासकीय पद हासिल करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
स्थानीय स्तर पर इस फैसले की सराहना की जा रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि भविष्य में नियुक्ति प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाया जाए तथा दस्तावेजों की गहन जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि इस तरह की अनियमितताओं की पुनरावृत्ति न हो।