भाजपा मंडल अध्यक्ष का कथित ऑडियो वायरल, RES अधिकारी पर भ्रष्टाचार और भुगतान रोकने के गंभीर आरोप

बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ विकासखंड में भाजपा मंडल अध्यक्ष मोहन लाल अग्रवाल का एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। ऑडियो में ग्रामीण अभियांत्रिकी सेवा (RES) के अधिकारी सच्चिदानंद कांत पर स्पेस लैब निर्माण कार्य के भुगतान में टालमटोल और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। मामले ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को तेज कर दिया है।

Jun 16, 2026 - 11:32
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भाजपा मंडल अध्यक्ष का कथित ऑडियो वायरल, RES अधिकारी पर भ्रष्टाचार और भुगतान रोकने के गंभीर आरोप

UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ विकासखंड से एक कथित वायरल ऑडियो ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे इस ऑडियो में भाजपा मंडल अध्यक्ष मोहन लाल अग्रवाल द्वारा ग्रामीण अभियांत्रिकी सेवा (RES) के अधिकारी सच्चिदानंद कांत पर गंभीर आरोप लगाए जाने की बात सामने आई है।

जानकारी के अनुसार, मामला शंकरगढ़ ब्लॉक के विभिन्न स्कूलों में बच्चों के लिए बनाए गए अंतरिक्ष कक्ष (स्पेस लैब) निर्माण कार्यों के भुगतान से जुड़ा बताया जा रहा है। वायरल ऑडियो में कथित तौर पर यह आरोप लगाया गया है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद संबंधित भुगतान जारी करने में अनावश्यक देरी की जा रही है और भुगतान प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

ऑडियो में यह भी दावा किया गया है कि भुगतान रोकने के संबंध में मुख्यमंत्री का नाम लिया गया। कथित बातचीत में कहा गया कि भुगतान इसलिए रोका गया है क्योंकि मुख्यमंत्री स्तर से ऐसा निर्देश प्राप्त हुआ है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।

भाजपा मंडल अध्यक्ष मोहन लाल अग्रवाल का कहना है कि उन्होंने इस मामले की शिकायत विभिन्न स्तरों पर की है। उनके अनुसार संबंधित विषय को लेकर प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

वहीं इस पूरे घटनाक्रम को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। स्थानीय लोगों और राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठाया जा रहा है कि यदि आरोपों में सच्चाई है तो मामले की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं कराई जा रही है। दूसरी ओर कुछ लोग वायरल ऑडियो की प्रामाणिकता और संदर्भ को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं।

फिलहाल इस वायरल ऑडियो की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। न ही संबंधित अधिकारी या प्रशासन की ओर से इस विषय पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

हालांकि, वायरल ऑडियो ने एक बार फिर सरकारी निर्माण कार्यों के भुगतान, प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या आरोपों की जांच कराई जाती है।