टीबी मुक्त भारत की दिशा में बालोद का ऐतिहासिक कदम, 100 से अधिक ग्राम पंचायतों को क्षयरोग मुक्त करने का लक्ष्य

बालोद जिला ने टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत वर्ष 2025 में 100 से अधिक ग्राम पंचायतों को क्षयरोग मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। पूर्व में 72 पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया जा चुका है। जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से यह अभियान जनआंदोलन का रूप ले रहा है।

Feb 26, 2026 - 11:19
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टीबी मुक्त भारत की दिशा में बालोद का ऐतिहासिक कदम, 100 से अधिक ग्राम पंचायतों को क्षयरोग मुक्त करने का लक्ष्य

UNITED NEWS OF ASIA.परस साहू, बालोद | भारत सरकार द्वारा वर्ष 2023 में प्रारंभ किए गए टीबी मुक्त ग्राम पंचायत अभियान ने पूरे देश में क्षयरोग के विरुद्ध एक मजबूत जनआंदोलन का स्वरूप ले लिया है। भारत को टीबी से पूरी तरह मुक्त करने के लक्ष्य में स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है। इसी राष्ट्रीय प्रयास के अंतर्गत छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज करते हुए पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इस सफलता की एक प्रेरणादायक शुरुआत बालोद जिला से हो रही है।

बालोद जिले ने टीबी उन्मूलन की दिशा में मजबूत प्रतिबद्धता दिखाई है। विगत वर्ष जिले की 72 ग्राम पंचायतों ने टीबी मुक्त होने का गौरवपूर्ण प्रमाण पत्र प्राप्त किया था। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि स्वास्थ्य विभाग और पंचायत प्रतिनिधियों ने जमीनी स्तर पर गंभीरता और निरंतरता के साथ कार्य किया है। वर्ष 2025 में जिले के सभी विकासखंडों में बेहतर कार्य करते हुए 100 से अधिक ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। वर्तमान में संबंधित ग्राम पंचायतों में स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन द्वारा सत्यापन की प्रक्रिया कड़ाई से की जा रही है। सत्यापन पूर्ण होने के बाद इन पंचायतों को औपचारिक रूप से सम्मानित किया जाएगा।

जिले में टीबी उन्मूलन की इस सफलता के पीछे सामुदायिक भागीदारी की अहम भूमिका रही है। संभावित टीबी मरीजों की पहचान के लिए घर-घर सर्वे किया जा रहा है तथा प्रारंभिक लक्षण पाए जाने पर तुरंत जांच सुनिश्चित की जा रही है, ताकि संक्रमण के फैलाव को समय रहते रोका जा सके। अब जिले में टीबी को छिपाने की बजाय सामने आकर इलाज कराने की प्रवृत्ति बढ़ी है।

इस अभियान की एक विशेष पहल “निक्षय मित्र” योजना है, जिसके माध्यम से समाज के सक्षम नागरिक, अधिकारी एवं संस्थाएं टीबी मरीजों को गोद लेकर उनके उपचार और पोषण में सहयोग कर रही हैं। मरीजों को नियमित रूप से पोषण आहार किट उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो सके। पंचायत स्तर पर मरीजों को निःशुल्क इलाज के साथ मानसिक संबल भी दिया जा रहा है, ताकि वे इस बीमारी से लड़ाई में स्वयं को अकेला न महसूस करें।

जिले में वर्तमान में 07 टीबी मितान कार्यरत हैं, जो स्वयं टीबी से ठीक हो चुके हैं और अब गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने का कार्य कर रहे हैं। टीबी मितान मरीजों के घर जाकर उन्हें नियमित दवा लेने के लिए प्रेरित करते हैं और उपचार प्रक्रिया में सहयोग भी प्रदान करते हैं।

आज आयोजित स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने टीबी मुक्त ग्राम पंचायत अभियान के अंतर्गत बेहतर कार्य सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जे.एल. उईके, जिला टीबी अधिकारी डॉ. जी.आर. रावटे तथा जिला कार्यक्रम प्रबंधक अखिलेश शर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

जिले में जिस गति और उत्साह के साथ यह अभियान संचालित हो रहा है, उससे यह स्पष्ट है कि टीबी को जड़ से समाप्त करने का राष्ट्रीय लक्ष्य अब अधिक दूर नहीं है। बालोद जिले का यह संयुक्त प्रयास जिले को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ा रहा है।

आप भी बन सकते हैं निक्षय मित्र

भारत को टीबी मुक्त बनाने के राष्ट्रीय संकल्प के तहत जिला स्वास्थ्य समिति एवं राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम बालोद द्वारा आम नागरिकों से निक्षय मित्र बनने की अपील की गई है। एक मरीज के लिए निर्धारित मासिक फूड बास्केट में छह प्रकार की पौष्टिक सामग्री शामिल होती है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 500 रुपये है। कोई भी व्यक्ति या संस्था मरीजों को गोद लेकर पोषण, अतिरिक्त जांच सहयोग तथा व्यावसायिक समर्थन प्रदान कर सकती है।

निक्षय मित्र बनने के लिए इच्छुक नागरिक TB India पोर्टल पर पंजीकरण कर सकते हैं अथवा स्वास्थ्य विभाग के टोल फ्री नंबर 1800-11-6666 पर संपर्क कर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।