रेलवे निर्माण से खतरे में प्राचीन मंदिर: बैकुंठपुर में लापरवाही पर कार्रवाई की मांग
बैकुंठपुर में रेलवे निर्माण कार्य के दौरान लापरवाही के चलते एक प्राचीन मंदिर खतरे में आ गया है। युवा पत्रकार प्रदीप कुमार ने कलेक्टर से हस्तक्षेप और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. महेन्द्र शुक्ला, कोरिया l छत्तीसगढ़ के बैकुंठपुर शहर में रेलवे प्रशासन की लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां निर्माण कार्य के चलते एक प्राचीन मंदिर का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
बैकुंठपुर रोड रेलवे स्टेशन क्षेत्र में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) द्वारा सीनियर सेक्शन इंजीनियर के लिए एक भवन का निर्माण कराया जा रहा है। लेकिन इस निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी ने एक धार्मिक स्थल को जोखिम में डाल दिया है।
स्थानीय युवा पत्रकार प्रदीप कुमार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर को आवेदन सौंपा है और तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि निर्माण स्थल पर की गई गहरी खुदाई के कारण मंदिर की नींव कमजोर हो गई है और अब यह कभी भी गिर सकता है।
जानकारी के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान गहरी खुदाई की गई, लेकिन इंजीनियरिंग नियमों के अनुसार आवश्यक सुरक्षा दीवार (रेटेनिंग वॉल) का निर्माण नहीं किया गया। यही कारण है कि मंदिर अब केवल मिट्टी के सहारे खड़ा है और किसी भी समय हादसे का शिकार हो सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मंदिर वर्षों पुराना आस्था का केंद्र है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते थे। लेकिन अब स्थिति ऐसी हो गई है कि लोग मंदिर जाने से डर रहे हैं।
इस मामले ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि स्थानीय लोगों की धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंचाई है। प्रदीप कुमार ने अपने आवेदन में स्पष्ट कहा है कि यह लापरवाही जनता की आस्था और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।
उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की तत्काल जांच कर दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही मंदिर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि कोई बड़ा हादसा टाला जा सके।
वहीं, स्थानीय नागरिकों ने भी प्रशासन से इस मामले में जल्द हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो मंदिर को गंभीर नुकसान हो सकता है और श्रद्धालुओं की जान भी खतरे में पड़ सकती है।
यह मामला विकास कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का एक गंभीर उदाहरण है, जो यह दर्शाता है कि लापरवाही कितनी बड़ी समस्या बन सकती है। अब सभी की नजर जिला प्रशासन पर टिकी है कि वह इस मुद्दे पर क्या कार्रवाई करता है।