अबूझमाड़ से निकले सितारे: रामकृष्ण मिशन आश्रम के फुटबॉल खिलाड़ी खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में चमके

नारायणपुर के अबूझमाड़ स्थित रामकृष्ण मिशन विवेकानंद आश्रम के खिलाड़ी खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। पुरुष और महिला टीमों में आश्रम के खिलाड़ियों की बड़ी भूमिका रही है।

Apr 1, 2026 - 15:38
 0  2
अबूझमाड़ से निकले सितारे: रामकृष्ण मिशन आश्रम के फुटबॉल खिलाड़ी खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में चमके

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के सुदूर अबूझमाड़ क्षेत्र से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां संघर्ष और अभाव के बीच खेल ने नई पहचान गढ़ी है। वर्ष 1986 में स्थापित रामकृष्ण मिशन विवेकानंद आश्रम आज आदिवासी बच्चों के लिए शिक्षा और खेल का केंद्र बनकर उभरा है और फुटबॉल प्रतिभाओं की एक मजबूत पाइपलाइन तैयार कर रहा है।

इस आश्रम का प्रभाव वर्तमान खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़ की पुरुष और महिला फुटबॉल टीमों में एक दर्जन से अधिक खिलाड़ी इसी आश्रम से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। जहां महिला टीम फाइनल में पहुंच चुकी है, वहीं पुरुष टीम ने भी सेमीफाइनल में अपनी जगह बना ली है।

छत्तीसगढ़ फुटबॉल संघ के सहायक महासचिव और एआईएफएफ कार्यकारी समिति के सदस्य मोहन लाल के अनुसार, दोनों टीमों में लगभग 12-13 खिलाड़ी रामकृष्ण मिशन अकादमी से हैं। यह उपलब्धि न केवल आश्रम की खेल संरचना को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि सही मार्गदर्शन मिलने पर दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चे भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।

कभी नक्सल प्रभावित और अलगाव के लिए पहचाने जाने वाले बस्तर क्षेत्र में स्थित यह आश्रम दशकों से दूर-दराज के आदिवासी गांवों के बच्चों तक शिक्षा और अवसर पहुंचाने का कार्य कर रहा है। कई गांव ऐसे हैं जहां आज भी औपचारिक शिक्षा की पहुंच सीमित है, लेकिन आश्रम इन बच्चों को निःशुल्क शिक्षा के साथ-साथ खेल और संगीत में भी आगे बढ़ने का अवसर देता है।

आश्रम में बच्चों को कम उम्र से ही विभिन्न खेलों से परिचित कराया जाता है और उन्हें व्यवस्थित प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे शिक्षा के साथ-साथ खेल में भी करियर बना सकें। हर साल लगभग 50 से 60 छात्र राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं, जो यहां की निरंतर उभरती प्रतिभाओं का प्रमाण है।

खेल सुविधाओं की बात करें तो आश्रम में तीन फुटबॉल मैदान हैं, जिनमें एक एस्ट्रो-टर्फ भी शामिल है। इसके अलावा बैडमिंटन, टेबल टेनिस, खो-खो और मल्लखंभ के लिए आधुनिक इनडोर एरेना भी मौजूद हैं। यह बुनियादी ढांचा खिलाड़ियों को उच्च स्तर की तैयारी का अवसर देता है।

मोहन लाल का मानना है कि खेल ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज इस आश्रम में 2,700 से अधिक बच्चे रहते हैं, जहां उन्हें न केवल शिक्षा बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर, खिलाड़ी और शिक्षाविद बनने के सपने देखने का अवसर मिलता है।

उन्होंने कहा कि यह संस्थान देश के सर्वश्रेष्ठ आवासीय स्कूलों में से एक बन चुका है, जो शिक्षा और खेल के माध्यम से जीवन को नई दिशा दे रहा है। आश्रम से निकले कई छात्र आज देश की बड़ी कंपनियों में कार्यरत हैं और प्रतिष्ठित संस्थानों में अध्ययन कर रहे हैं।

गौरतलब है कि रामकृष्ण मिशन फुटबॉल अकादमी राज्य का पहला क्लब बना, जिसने ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन द्वारा आयोजित अंडर-17 यूथ कप और आई-लीग 2 जैसी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया।

इस तरह, अबूझमाड़ का यह आश्रम न केवल खेल प्रतिभाओं को तराश रहा है, बल्कि एक पूरे क्षेत्र के भविष्य को नई दिशा देने का काम भी कर रहा है।