छात्रवृत्ति नहीं मिलने पर प्रधानपाठक का वेतन रोकने पर आप ने उठाए सवाल, सूरज उपाध्याय बोले जिम्मेदारी तय हो

छात्रवृत्ति वितरण में देरी को लेकर प्रधानपाठकों का वेतन रोकने संबंधी आदेश पर आम आदमी पार्टी ने आपत्ति जताई है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सूरज उपाध्याय ने कहा कि छात्रवृत्ति वितरण की जिम्मेदारी कई स्तरों पर होती है, ऐसे में केवल प्रधानपाठक को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने बदहाल सड़कों, बिजली कंपनी के घाटे और स्वास्थ्य व्यवस्था की कमियों को लेकर भी सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।

Sep 1, 2026 - 09:17
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छात्रवृत्ति नहीं मिलने पर प्रधानपाठक का वेतन रोकने पर आप ने उठाए सवाल, सूरज उपाध्याय बोले जिम्मेदारी तय हो

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति नहीं मिलने की स्थिति में संबंधित स्कूल के प्रधानपाठक का वेतन रोकने संबंधी आदेश को लेकर आम आदमी पार्टी ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सूरज उपाध्याय ने इस आदेश पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि छात्रवृत्ति वितरण एक विभागीय और प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसमें स्कूल स्तर से लेकर विकासखंड, जिला और विभाग स्तर तक कई स्तरों पर जिम्मेदारियां निर्धारित होती हैं। ऐसे में पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी केवल प्रधानपाठक पर डालकर उनका वेतन रोकने की चेतावनी देना उचित नहीं है।

सूरज उपाध्याय ने कहा कि शिक्षक संघ भी इस आदेश का विरोध कर चुका है और इसे तुगलकी फरमान बताया गया है। उन्होंने कहा कि यदि छात्रवृत्ति जैसी सरकारी योजना का लाभ विद्यार्थियों तक नहीं पहुंचने पर संबंधित कर्मचारी का वेतन रोकना सरकार की नीति है, तो फिर यही व्यवस्था अन्य विभागों में भी समान रूप से लागू होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि यदि बदहाल और जर्जर सड़कों के कारण आम जनता परेशान है तो क्या इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों का वेतन भी रोका जाएगा।

आप मुख्य प्रवक्ता ने बिजली कंपनी में घाटे को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी विभाग या सरकारी कंपनी में लगातार घाटा हो रहा है तो वहां जिम्मेदारी तय करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान सड़कों की स्थिति खराब होने, जगह-जगह गड्ढे होने और इनके कारण लोगों की सुरक्षा प्रभावित होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने को लेकर सरकार को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।

सूरज उपाध्याय ने सड़कों पर मवेशियों के जमावड़े का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि खुले में घूमते मवेशियों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है और कई बार लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में नगर निगम, नगर पालिका और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की जरूरत है। उन्होंने सवाल किया कि जब आम जनता से जुड़े मामलों में प्रशासनिक लापरवाही सामने आती है तो क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर भी उसी तरह कार्रवाई की जाएगी, जैसी कार्रवाई प्रधानपाठकों के मामले में प्रस्तावित की जा रही है।

स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी आम आदमी पार्टी ने सरकार को घेरा। सूरज उपाध्याय ने कहा कि अस्पतालों में डॉक्टरों, दवाइयों, जांच सुविधाओं और अन्य मूलभूत संसाधनों की कमी की शिकायतें सामने आती रहती हैं। यदि स्वास्थ्य व्यवस्था में कमियां हैं और इसका असर आम जनता पर पड़ रहा है तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से पूछा कि स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और विभागीय स्तर पर जवाबदेही तय करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

सूरज उपाध्याय ने कहा कि सरकार को छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई दिखाकर अपनी जिम्मेदारी से बचने के बजाय पूरी प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही तय करनी चाहिए। छात्रवृत्ति वितरण में यदि देरी हुई है तो पहले यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि प्रक्रिया के किस स्तर पर देरी हुई, किस अधिकारी की क्या जिम्मेदारी थी और वास्तविक लापरवाही किस स्तर पर हुई। उन्होंने कहा कि बिना पूरी प्रक्रिया की जांच किए केवल प्रधानपाठक को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।

आम आदमी पार्टी ने जिलों के BEO कार्यालयों से जारी छात्रवृत्ति संबंधी आदेश की समीक्षा कर उसे तत्काल वापस लेने की मांग की है। पार्टी ने छात्रवृत्ति से वंचित विद्यार्थियों को जल्द लाभ दिलाने और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो वास्तविक जिम्मेदार अधिकारी की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

पार्टी ने कहा कि सरकारी व्यवस्था की कमियों का जिम्मेदार शिक्षकों और प्रधानपाठकों को ठहराने के बजाय सरकार को प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए। आम आदमी पार्टी का कहना है कि प्रत्येक विभाग में जिम्मेदारी के अनुसार जवाबदेही तय होने से ही सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर आम जनता तक पहुंचाया जा सकेगा।