ब्रेस्ट एवं सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. आकांक्षा चिखलीकर के अनुसार कैंसर की शुरुआती पहचान इलाज की संभावनाओं को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उनका कहना है कि स्क्रीनिंग का उद्देश्य कैंसर या कैंसर से पहले होने वाले बदलावों को शुरुआती और उपचार योग्य अवस्था में पहचानना है। इसी सोच को वह जांच ही जीत है के संदेश के साथ लोगों तक पहुंचाने की सलाह देती हैं।
स्तन कैंसर इसका महत्वपूर्ण उदाहरण है। कई मामलों में स्तन में स्पष्ट गांठ महसूस नहीं होती, इसके बावजूद बीमारी मौजूद हो सकती है। इसलिए उम्र और व्यक्तिगत जोखिम कारकों के अनुसार डॉक्टर की सलाह से क्लिनिकल जांच और मैमोग्राफी जैसी स्क्रीनिंग कराना महत्वपूर्ण हो सकता है। विशेष रूप से 40 वर्ष की आयु के बाद स्क्रीनिंग के संबंध में चिकित्सकीय सलाह लेना उपयोगी माना जाता है।
गर्भाशय ग्रीवा यानी सर्वाइकल कैंसर में भी स्क्रीनिंग की अहम भूमिका है। नियमित जांच से ऐसे असामान्य बदलावों का पता लगाया जा सकता है, जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकते हैं। शुरुआती स्तर पर इन बदलावों की पहचान होने से समय रहते चिकित्सकीय कदम उठाए जा सकते हैं।
इसी तरह कोलन कैंसर की स्क्रीनिंग से कोलन में मौजूद कुछ पॉलिप का पता लगाया जा सकता है। चिकित्सकीय मूल्यांकन के दौरान ऐसे पॉलिप की पहचान और आवश्यक उपचार भविष्य में गंभीर बीमारी के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
हालांकि कैंसर स्क्रीनिंग सभी लोगों के लिए एक जैसी नहीं होती। स्क्रीनिंग का तरीका और समय व्यक्ति की उम्र, पारिवारिक इतिहास तथा अन्य जोखिम कारकों के आधार पर अलग हो सकता है। यदि परिवार में करीबी रिश्तेदारों को कैंसर रहा है, तो कुछ लोगों को सामान्य सिफारिशों की तुलना में पहले या अधिक नियमित रूप से जांच की आवश्यकता हो सकती है। ऐसे मामलों में डॉक्टर से व्यक्तिगत सलाह लेना जरूरी है।
यह भी समझना महत्वपूर्ण है कि कोई भी मेडिकल टेस्ट पूरी तरह सटीक नहीं होता। असामान्य स्क्रीनिंग रिपोर्ट का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति को निश्चित रूप से कैंसर है। इसी तरह सामान्य रिपोर्ट से यह पूरी तरह साबित नहीं होता कि भविष्य में कैंसर का कोई जोखिम नहीं है। इसलिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार आवश्यक फॉलोअप और नियमित स्क्रीनिंग जारी रखना महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर जागरूक रहें और किसी भी शंका या असामान्य बदलाव की स्थिति में चिकित्सक से संपर्क करें। लक्षणों का इंतजार करने के बजाय उम्र और जोखिम के अनुसार उचित स्क्रीनिंग अपनाना कैंसर की जल्द पहचान में मदद कर सकता है।
समय पर पहचान होने से बीमारी के उपचार के विकल्प बेहतर हो सकते हैं। इसलिए स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित जांच कराना बेहद जरूरी है। जांच ही जीत है और समय पर पहचान जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।