स्वामित्व योजना से रायगढ़ के 19,917 ग्रामीणों को मिला संपत्ति का अधिकार अभिलेख
रायगढ़ जिले में स्वामित्व योजना के तहत अब तक 19,917 ग्रामीणों को उनकी मकान एवं परिसंपत्तियों का अधिकार अभिलेख वितरित किया जा चुका है। जिले के 884 ग्रामों में ड्रोन सर्वे कराया गया है, जबकि भारतीय सर्वेक्षण विभाग से 774 ग्रामों के नक्शे एवं अधिकार अभिलेख प्राप्त हो चुके हैं। योजना के तहत ग्रामीणों की संपत्तियों का वैज्ञानिक और सटीक अभिलेखीकरण किया जा रहा है।
UNITED NEWS OF ASIA. महेंद्र अग्रवाल, रायगढ़ l ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का विधिवत अधिकार दिलाने के उद्देश्य से रायगढ़ जिले में स्वामित्व योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। योजना के माध्यम से आबादी भूमि पर वर्षों से मकान और अन्य परिसंपत्तियां बनाकर रह रहे ग्रामीणों को अब उनकी संपत्ति का प्रमाणिक दस्तावेज उपलब्ध कराया जा रहा है। जिले में अब तक 19 हजार 917 हितग्राहियों को मकान एवं परिसंपत्तियों का स्वामित्व प्रमाण-पत्र यानी अधिकार अभिलेख वितरित किया जा चुका है।
अधिकार अभिलेख मिलने से ग्रामीणों के बीच अपनी संपत्ति को लेकर सुरक्षा और विश्वास की भावना मजबूत हुई है। वहीं गांवों में योजना को लेकर उत्साह भी देखने को मिल रहा है।
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देशानुसार जिले के 884 ग्रामों की आबादी भूमि का ड्रोन के माध्यम से सर्वे कराया गया है। इनमें से भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा 774 ग्रामों के नक्शे और अधिकार अभिलेख जिला प्रशासन को उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इसके बाद 384 ग्रामों में ग्रामीणों को अधिकार अभिलेख वितरित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
तहसीलवार आंकड़ों की बात करें तो कापू में 2,218, खरसिया में 701, घरघोड़ा में 6,468, छाल में 1,282, तमनार में 1,570, धरमजयगढ़ में 1,004, पुसौर में 2,702, मुकडेगा में 1,117, रायगढ़ में 1,159 और लैलूंगा में 1,696 हितग्राहियों को अधिकार अभिलेख वितरित किए जा चुके हैं।
क्या है स्वामित्व योजना
स्वामित्व योजना के अंतर्गत ग्रामीण आबादी भूमि में स्थित मकानों और अन्य परिसंपत्तियों का GIS आधारित सर्वेक्षण तथा ड्रोन के माध्यम से भू-मापन किया जाता है। सर्वेक्षण के आधार पर प्रत्येक संपत्ति की स्थिति, सीमा और क्षेत्रफल निर्धारित कर स्वामित्व प्रमाण-पत्र यानी अधिकार अभिलेख तैयार किया जाता है।
ग्रामीण आबादी के सर्वेक्षण का कार्य राजस्व विभाग और भारतीय सर्वेक्षण विभाग, देहरादून के संयुक्त प्रयास से किया जा रहा है। इससे गांवों में निजी और सार्वजनिक संपत्तियों का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार हो रहा है।
संपत्तियों की सीमा और क्षेत्रफल स्पष्ट होने से भविष्य में निजी संपत्ति से जुड़े विवादों में कमी आने की उम्मीद है। वहीं रास्ते, ग्राम पंचायत की खुली भूमि, नाले, तालाब और सरोवर जैसी सार्वजनिक संपत्तियों की सीमाएं भी स्पष्ट होंगी, जिससे इनके संरक्षण और रखरखाव में ग्राम पंचायतों को सुविधा मिलेगी।
ग्रामीणों के लिए उपयोगी दस्तावेज
अधिकार अभिलेख मिलने से ग्रामीणों को अपनी संपत्ति का प्रमाणिक और व्यवस्थित रिकॉर्ड प्राप्त हो रहा है। संपत्ति का स्वामित्व प्रमाण-पत्र उपलब्ध होने से आवश्यकता पड़ने पर मकान या संपत्ति के आधार पर बैंक ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया में भी मदद मिल सकती है।
ड्रोन तकनीक के माध्यम से किए जा रहे सर्वेक्षण से संपत्तियों का मापन और अभिलेख निर्माण अधिक सटीक तरीके से किया जा रहा है। इसके साथ ही संपत्ति रजिस्टर तैयार होने से ग्राम पंचायतों को अपने क्षेत्र के संपत्ति धारकों की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध होगी।
इससे स्थानीय स्तर पर विकास योजनाएं तैयार करने, सार्वजनिक सुविधाओं की बेहतर योजना बनाने और ग्राम विकास की प्राथमिकताएं तय करने में भी मदद मिलेगी।
स्वामित्व योजना ग्रामीणों के लिए केवल संपत्ति का दस्तावेज उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके वर्षों के निवास और संपत्ति पर अधिकार को प्रमाणिक पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। अधिकार अभिलेख मिलने से ग्रामीणों को अपनी संपत्ति के सुरक्षित और विधिवत दर्ज होने का भरोसा मिल रहा है।