2.68 करोड़ के काम पर सवाल: पहली बारिश में ही दरारें और धंसाव, किसानों की बढ़ी चिंता

कवर्धा के बेल्हारी बांध में जीर्णोद्धार और नहरों को पक्का करने के लिए चल रहे 2.68 करोड़ रुपये के कार्य के बीच बारिश में तटबंध के कुछ हिस्सों में दरारें, धंसाव और रिसाव की शिकायत सामने आई है। ग्रामीणों ने जल संसाधन विभाग से तत्काल तकनीकी निरीक्षण और आवश्यक सुरक्षा उपायों की मांग की है। युवा कांग्रेस प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी ने निर्माण कार्यों में कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार की जांच की मांग उठाई है।

Aug 13, 2026 - 13:51
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2.68 करोड़ के काम पर सवाल: पहली बारिश में ही दरारें और धंसाव, किसानों की बढ़ी चिंता

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l ग्राम पंचायत छोटू पारा के पास जंगलों के बीच स्थित बेल्हारी बांध इन दिनों गंभीर संकट में है। करीब 56 साल पुराने इस बांध के जीर्णोद्धार और नहरों को पक्का करने के लिए 2.68 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन काम पूरा होने से पहले ही बारिश में बांध के तटबंध के कई हिस्से धंस गए हैं।

तटबंध में जगह-जगह गहरी दरारें पड़ गई हैं और मिट्टी का लगातार कटाव हो रहा है। स्थिति यह है कि तटबंध से रिस रहा पानी अब खेतों तक पहुंचने लगा है। इससे बांध पर निर्भर करीब 162 एकड़ यानी लगभग 65 हेक्टेयर फसल पर नुकसान का खतरा मंडरा रहा है।

जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली पर किसानों ने उठाए सवाल 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि बांध को मजबूत करने के नाम पर करोड़ों रुपये का काम कराया जा रहा है, फिर निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही बारिश में तटबंध कमजोर कैसे पड़ गया? ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने तटबंध से हो रहे रिसाव और स्थिति की जानकारी जल संसाधन विभाग को पहले ही दे दी थी।

इसके बावजूद रिसाव रोकने अथवा तटबंध को तत्काल मजबूत करने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।ग्रामीणों ने जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारी नियमित रूप से बांधों का तकनीकी निरीक्षण नहीं करते और न ही समय पर आवश्यक मरम्मत कार्य कराए जाते हैं। उनका कहना है कि यदि समय-समय पर निरीक्षण और तटबंध की मरम्मत होती रहती तो आज यह स्थिति निर्मित नहीं होती। 

नहर, नाले, जलाशय जीर्णोद्धार, सीसी नहर लाइनिंग एवं तटबंध निर्माण कार्यों में कमीशनखोरी  - आकाश केशरवानी 

प्रदेश सचिव युवा कांग्रेस आकाश केशरवानी ने कहा है की कबीरधाम जिले में जल संसाधन विभाग के नहर, नाले, जलाशय जीर्णोद्धार, सीसी नहर लाइनिंग एवं तटबंध निर्माण कार्यों में कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं।विकास के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं,

लेकिन जमीनी हकीकत में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सवालों के घेरे में है। काम पूरा होने से पहले ही नहरों और तटबंधों का दम निकल रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विभाग को अनियमितताओं की जानकारी पहले से दी जा रही है, तो जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई क्यों नहीं करते? क्या जिला प्रशासन को सब दिखाई नहीं दे रहा, या फिर भ्रष्टाचार पर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं?

जनपद सदस्य लीला धनुक वर्मा ने भी उठाए सवाल

जनपद सदस्य लीला धनुक वर्मा ने विभागीय जवाब पर सवाल उठाते हुए मामले को गंभीर बताया और तत्काल कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तटबंध में दरारें और मिट्टी का रिसाव मौके पर दिखाई दे रहा है तो इसे सामान्य स्थिति मानकर छोड़ना जोखिम भरा हो सकता है।

और न ही रिसाव रोकने के लिए कोई प्रभावी आपातकालीन उपाय शुरू किए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि विभाग नियमित रूप से तटबंध का तकनीकी निरीक्षण करता और समय पर मरम्मत कराता तो बारिश के दौरान यह स्थिति निर्मित नहीं होती। उनका कहना है कि अभी काम पूरा भी नहीं हुआ है और तटबंध पर जलदाब बढ़ने के बाद उसकी स्थिति पर सवाल खड़े हो गए हैं।