औषधि पौधों की खेती किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम: वन मंत्री केदार कश्यप

हरेली तिहार की पूर्व संध्या पर छत्तीसगढ़ शासन ने औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों और स्व-सहायता समूहों को 54.36 लाख रुपये की अग्रिम प्रोत्साहन राशि वितरित की। वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि कम लागत, कम पानी और कम रासायनिक खाद की आवश्यकता के कारण औषधीय पौधों की खेती किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। कार्यक्रम में नारायणपुर और धमतरी के किसानों एवं स्व-सहायता समूहों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई।

Aug 12, 2026 - 11:57
Aug 12, 2026 - 11:58
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औषधि पौधों की खेती किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम: वन मंत्री केदार कश्यप

UNITED NEWS OF ASIA. पारंपरिक फसलों की तुलना में औषधीय पौधों की खेती कम लागत, कम पानी और कम रासायनिक खाद में की जा सकती है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इनकी मांग को देखते हुए अश्वगंधा, शतावर, एलोवेरा, तुलसी और लेमनग्रास जैसी फसलें किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी विकल्प बन रही हैं। इसी दिशा में हरेली तिहार की पूर्व संध्या पर छत्तीसगढ़ शासन ने औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया।

वन विभाग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा राज्य वन अनुसंधान भवन, जीरो पॉइंट में आयोजित कार्यक्रम में नारायणपुर अबूझमाड़ और धमतरी जिले के किसानों तथा स्व-सहायता समूहों को कुल 54 लाख 36 हजार रुपये की अग्रिम प्रोत्साहन राशि वितरित की गई। कार्यक्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ राज्य औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ने की। उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला और विधायक अनुज शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि औषधीय पौधों की खेती किसानों के लिए कम लागत और अधिक लाभ वाला विकल्प बनकर उभर रही है। इसमें पानी की आवश्यकता कम होती है और कीटनाशकों पर खर्च भी अपेक्षाकृत कम रहता है। किसान खेतों की मेड़ों पर औषधीय पौधे लगाकर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ का प्राचीन और कृषि संस्कृति से जुड़ा प्रमुख पर्व है। ऐसे अवसर पर किसानों को औषधीय पौधों की खेती के लिए अग्रिम प्रोत्साहन राशि देना उनके लिए आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण उपहार है।

कार्यक्रम में बोर्ड अध्यक्ष विकास मरकाम ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में बोर्ड वनौषधियों के संरक्षण, संवर्धन, पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण, वैद्यों के क्षमता विकास और किसानों की आय बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी लगभग 50 दुर्लभ औषधीय प्रजातियों के संरक्षण और संवर्धन का कार्य भी प्रारंभ किया गया है।

बोर्ड उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला ने कहा कि वनौषधियां हमारी पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणाली का महत्वपूर्ण आधार हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी अनेक प्राकृतिक औषधीय पौधों का उपयोग किया जाता है। बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जे.ए.सी.एस. राव ने बताया कि औषधीय पौधों की खेती को मिशन मोड में बढ़ावा दिया जा रहा है। किसानों को निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराने के साथ उनकी उपज की खरीद की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे किसानों को विपणन संबंधी कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

कार्यक्रम में नारायणपुर अबूझमाड़ के 25 किसान, धमतरी जिले के 18 किसान और 43 स्व-सहायता समूहों को कुल 54.36 लाख रुपये की अग्रिम प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। यह राशि बोर्ड द्वारा अनुबंधित संस्थाओं मेसर्स स्टीविया और इंस्टा हर्ब्स के माध्यम से उपलब्ध कराई गई, ताकि किसान आर्थिक कठिनाई के बिना औषधीय पौधों की खेती शुरू कर सकें। पहल से किसानों की आय बढ़ाने, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने और छत्तीसगढ़ की पारंपरिक स्वास्थ्य परंपराओं के संरक्षण को नई गति मिलने की उम्मीद है।