किशनपुर पंचायत में कमीशनखोरी के आरोपों पर कार्रवाई का इंतजार, सचिव पर गंभीर सवाल
महासमुंद जिले के किशनपुर पंचायत में सचिव श्यामसुंदर नायक पर मजदूरी और सामग्री भुगतान के नाम पर 7 प्रतिशत कमीशन मांगने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत के बावजूद अब तक भुगतान और कथित कमीशनखोरी के आरोपों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं पंचायत भवन में मारपीट और आदिवासी महिला सरपंच के परिवार से कथित दुर्व्यवहार के मामले में भी पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
UNITED NEWS OF ASIA. शिखा दास, महासमुंद l जिले के किशनपुर ग्राम पंचायत में पंचायत सचिव पर लगाए गए कथित कमीशनखोरी के आरोपों को लेकर मामला एक बार फिर चर्चा में है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मजदूरी और निर्माण सामग्री के भुगतान के नाम पर 7 प्रतिशत कमीशन की मांग की गई। इस संबंध में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन सहित संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत किए जाने के बावजूद अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का दावा किया जा रहा है।
शिकायत के अनुसार कारपेंटर भोजराम साहू, मजदूर गजानंद निषाद, सिन्हा हार्डवेयर के संचालक विनोद सिन्हा और सिन्हा इंटरप्राइजेस के संचालक अमित सिन्हा ने मजदूरी एवं सामग्री की राशि के भुगतान की मांग को लेकर शिकायत की थी। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि भुगतान के एवज में 7 प्रतिशत कमीशन मांगे जाने की बात सामने आई थी।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मामले में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने के बाद जांच और निर्देश की प्रक्रिया तो हुई, लेकिन उन्हें कथित तौर पर बकाया राशि का भुगतान नहीं मिला और सचिव के खिलाफ भी अब तक ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इसी वजह से पंचायत स्तर पर प्रशासनिक कार्रवाई की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
मामले में पंचायत सचिव श्यामसुंदर नायक पर लगाए गए आरोपों की जांच की मांग की जा रही है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि आरोप गलत हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
इसी बीच पंचायत के कार्यों और वित्तीय लेनदेन को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव को एक से अधिक ग्राम पंचायतों का प्रभार दिया गया है, जबकि किशनपुर पंचायत में ही कथित अनियमितताओं को लेकर शिकायतें लंबित हैं। ग्रामीणों ने सचिव के कार्यकाल में हुए विभिन्न विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन और स्थल निरीक्षण कराने की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं की ओर से अठारहगुड़ी पंचायत से जुड़े कुछ कार्यों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कुछ कार्यों में बिना काम हुए राशि निकालने की आशंका है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि संबंधित पंचायतों में हुए सभी कार्यों का रिकॉर्ड के आधार पर भौतिक सत्यापन किया जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
मामले का एक दूसरा पहलू पंचायत भवन में हुई कथित मारपीट से जुड़ा है। शिकायत पक्ष का आरोप है कि जांच के दौरान आदिवासी महिला सरपंच और उनके पति के साथ कथित तौर पर जातिसूचक गाली-गलौज, मारपीट और धमकी की घटना हुई। शिकायत में उपसरपंच चंपेश्वर साहू और गौर चरण साहू के नाम भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस मामले की जानकारी पुलिस और अनुसूचित जाति-जनजाति से संबंधित अधिकारियों को दी गई है।
शिकायत पक्ष के अनुसार इस मामले में पुलिस अधीक्षक स्तर से कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद पिथौरा थाना और संबंधित एससी-एसटी थाना में बयान भी लिए जाने का दावा किया गया है, लेकिन प्राथमिकी दर्ज होने या अन्य कार्रवाई की स्थिति को लेकर शिकायतकर्ताओं को अब तक स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है।
पुलिस कार्रवाई को लेकर शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि शिकायत और बयान दर्ज हो चुके हैं तो मामले में कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। वहीं आरोपों की वास्तविकता और किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी जांच के निष्कर्ष के बाद ही तय हो सकती है।
इस पूरे मामले में जनपद पंचायत की जांच टीम की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत से जुड़े भ्रष्टाचार, अनियमितता और वित्तीय मामलों की जांच में निष्पक्षता नहीं दिखाई जा रही है। उनका कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष तरीके से हो तो पंचायत के विकास कार्यों, भुगतान और संबंधित दस्तावेजों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं की प्रमुख मांग है कि किशनपुर पंचायत में हुए सभी विकास कार्यों का रिकॉर्ड जांचा जाए, भुगतान से जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण किया जाए और आवश्यकता पड़ने पर प्रत्येक कार्य का स्थल निरीक्षण कराया जाए। साथ ही मजदूरों और सामग्री आपूर्तिकर्ताओं की लंबित राशि का सत्यापन कर नियमानुसार भुगतान कराने की मांग भी की जा रही है।
फिलहाल मामला पंचायत प्रशासन, जनपद पंचायत और पुलिस कार्रवाई के बीच आगे बढ़ रहा है। एक ओर शिकायतकर्ता कथित कमीशनखोरी और भुगतान संबंधी आरोपों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मारपीट और कथित जातिसूचक दुर्व्यवहार के आरोपों में भी पुलिस की अगली कार्रवाई का इंतजार है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि सचिव और अन्य संबंधित लोगों पर लगाए गए आरोप फिलहाल शिकायतों और आरोपों पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच और संबंधित विभागों की कार्रवाई के बाद ही हो सकेगी। अब देखना होगा कि प्रशासनिक जांच और पुलिस कार्रवाई में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और क्या शिकायतकर्ताओं की मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई होती है।