ऑपरेशन साइबर शील्ड: सोशल मीडिया फर्जी आईडी पर 11 आरोपियों की गिरफ्तारी, 50 लाख फॉलोवर वाली 262 फर्जी आईडी का खुलासा
ऑपरेशन साइबर शील्ड में 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर 262 फर्जी सोशल मीडिया आईडी, 50 लाख से अधिक फॉलोवर, और म्यूल बैंक खातों का खुलासा किया गया।
UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर, रायपुर। ऑपरेशन साइबर शील्ड के तहत साइबर अपराध में शामिल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर फर्जी आईडी के माध्यम से महिलाओं की फोटो और फर्जी मोबाइल नंबर के जरिए धोखाधड़ी करने वाले गैंग के खिलाफ की गई। जांच में कुल 262 फर्जी आईडी, 50 लाख से अधिक फॉलोवर और म्यूल बैंक खातों का खुलासा हुआ।
पुलिस महानिरीक्षक रायपुर रेंज,अमरेश मिश्रा के निर्देशन में रेंज साइबर थाना रायपुर ने विस्तृत जांच के बाद इस कार्रवाई को अंजाम दिया। म्यूल बैंक अकाउंट के प्रकरण में आरंभिक जांच से पता चला कि इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब पर फर्जी आईडी बनाकर लोगों को विवाह के इच्छुक वधू की फोटो दिखाकर धोखाधड़ी की जा रही थी। इन वायरल नंबरों पर कॉल करने वाले लोगों से रकम वसूल कर धोखाधड़ी की जाती थी।
जांच में पाया गया कि जमशेदपुर (झारखंड) और सरकंडा (बिलासपुर, छत्तीसगढ़) में कॉल सेंटर पिछले दो वर्षों से संचालित थे। पुलिस ने जमशेदपुर में 3 और बिलासपुर में 8 आरोपी गिरफ्तार किए। गिरफ्तार आरोपियों से 36 मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामग्री बरामद की गई।
गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं: शुभम दास, लक्ष्मण गोप, असित पातर, सूरज कुमार पटेल, सुखसागर कैवर्त, मानसु डाहिरे, अनिकेत कुलदीप, करण पुष्पकार, रमाकांत गंधर्व, सिराज खान और त्रियंबक कुमार भास्कर। इनके ठिकाने झारखंड और छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में पाए गए।
साइबर पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों ने देशभर के हजारों लोगों के साथ धोखाधड़ी की है। इसके अलावा, जांच में कई और लोगों के नाम सामने आए हैं, जो फर्जी आईडी बनाने, संचालित करने और म्यूल बैंक खातों का उपयोग ठगी के लिए करते थे। सभी आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी संदिग्ध प्रोफाइल, फर्जी आईडी या अनजान नंबर से संपर्क करते समय सतर्क रहें और धोखाधड़ी की सूचना तुरंत साइबर पुलिस को दें।
इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि साइबर अपराध में पुलिस जीरो टॉलरेंस पर काम कर रही है और डिजिटल धोखाधड़ी के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।