विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर बेमेतरा में जागरूकता अभियान, समय पर जांच और टीकाकरण से संक्रमण की रोकथाम पर जोर

विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर जिला चिकित्सालय बेमेतरा में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। विशेषज्ञों ने समय पर जांच, टीकाकरण, सुरक्षित खान-पान और स्वच्छ जीवनशैली को हेपेटाइटिस की रोकथाम का सबसे प्रभावी उपाय बताया। इस दौरान स्वास्थ्य कर्मियों एवं हितग्राहियों का हेपेटाइटिस-बी टीकाकरण भी किया गया।

Jul 29, 2026 - 16:44
 0  3
विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर बेमेतरा में जागरूकता अभियान, समय पर जांच और टीकाकरण से संक्रमण की रोकथाम पर जोर

UNITED NEWS OF ASIA. अरुण पुरेना, बेमेतरा l विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर जिला चिकित्सालय बेमेतरा में स्वास्थ्य विभाग द्वारा व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई के निर्देश एवं सीएमएचओ डॉ. अमृत लाल रोहलेडर के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को हेपेटाइटिस की रोकथाम, समय पर जांच, उपचार और टीकाकरण के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम के दौरान नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ सहित हितग्राहियों का हेपेटाइटिस-बी टीकाकरण भी किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. लोकेश साहू ने की। उन्होंने कहा कि हेपेटाइटिस एक गंभीर लेकिन रोकथाम योग्य बीमारी है। समय पर जांच, टीकाकरण और आवश्यक सावधानियां अपनाकर इस संक्रमण से प्रभावी रूप से बचाव किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष विश्व हेपेटाइटिस दिवस की थीम "हेपेटाइटिस: आओ इसे खत्म करें" रखी गई है, जो बीमारी के उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयासों का संदेश देती है।

डॉ. लोकेश साहू ने विशेष रूप से बरसात के मौसम में बढ़ने वाले संक्रमण के खतरे को देखते हुए नागरिकों से स्वच्छता अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि दूषित भोजन और पानी के सेवन से हेपेटाइटिस का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर उपयोग करें, स्वच्छ और सुरक्षित पानी पिएं, भोजन को पूरी तरह पकाकर खाएं तथा खुले और दूषित खाद्य पदार्थों से बचें। उन्होंने व्यक्तिगत स्वच्छता और सुरक्षित जीवनशैली को संक्रमण से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम बताया।

जिला चिकित्सालय के विशेषज्ञों ने हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी के लक्षणों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस-बी में बुखार, त्वचा पर चकत्ते, भूख कम लगना, अत्यधिक थकान, जोड़ों में दर्द और अवसाद जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। वहीं हेपेटाइटिस-सी के मरीजों में लगातार थकान, अनिद्रा, पैरों में सूजन, त्वचा में खुजली और गहरे रंग का मूत्र जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं। ऐसे किसी भी लक्षण के दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय जांच कराने की सलाह दी गई।

कार्यक्रम में संक्रमण से बचाव के लिए सुरक्षित रक्त चढ़ाने, केवल एक बार उपयोग होने वाले इंजेक्शन और रेजर ब्लेड का इस्तेमाल करने, व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुएं साझा नहीं करने तथा असुरक्षित यौन संबंधों से बचने की सलाह दी गई। साथ ही घावों को सुरक्षित ढंककर रखने और संक्रमण से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियां अपनाने पर भी जोर दिया गया।

विशेषज्ञों ने नवजात शिशुओं को जन्म के तुरंत बाद निर्धारित समय पर हेपेटाइटिस-बी का टीका लगाने, सभी गर्भवती महिलाओं की हेपेटाइटिस-बी जांच कराने तथा संक्रमित माता से जन्म लेने वाले शिशुओं को इम्यूनोग्लोब्युलिन एवं आवश्यक टीकाकरण उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

कार्यक्रम में जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. शरद कोहाड़े, जिला नोडल अधिकारी डॉ. अस्मिता श्रीवास्तव, विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सकों, अस्पताल प्रबंधक डॉ. स्वाति यदु, लैब इंचार्ज गीतांजलि बेहरा, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ, एएनएम, मितानिनों तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया। जिले के सभी शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में भी जागरूकता गतिविधियां आयोजित कर लोगों को स्वच्छता, सुरक्षित खान-पान, समय पर जांच, टीकाकरण और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।