सरायपाली में विराट 51 कुण्डीय राष्ट्र शौर्य समृद्धि गायत्री महायज्ञ का भव्य आयोजन
सरायपाली नगर में 31 दिसंबर से 3 जनवरी तक विराट 51 कुण्डीय राष्ट्र शौर्य समृद्धि गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। महायज्ञ के माध्यम से राष्ट्र की शौर्य शक्ति, समृद्धि, सामाजिक सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार का संदेश दिया जाएगा।
UNITED NEWS OF ASIA.जगदीश पटेल, सरायपाली। नगर में आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक जागरण और राष्ट्र निर्माण की भावना को सशक्त करने के उद्देश्य से “विराट 51 कुण्डीय राष्ट्र शौर्य समृद्धि गायत्री महायज्ञ” का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह महायज्ञ 31 दिसंबर से 3 जनवरी तक आयोजित होगा, जिसमें नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
आयोजकों के अनुसार, महायज्ञ के दौरान विधिवत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ 51 कुण्डों में आहुतियां दी जाएंगी। इन आहुतियों के माध्यम से राष्ट्र की शौर्य शक्ति, समृद्धि, सामाजिक एकता, शांति और सद्भावना के लिए सामूहिक प्रार्थना की जाएगी। आयोजकों का कहना है कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और व्यक्ति को आत्मिक तथा नैतिक मूल्यों से जोड़ते हैं।
महायज्ञ स्थल पर श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। यहां गायत्री माता से संबंधित साहित्य का एक विशेष पुस्तक मेला भी लगाया जाएगा। इस पुस्तक मेले में आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, नैतिक और प्रेरणादायी जीवन मूल्यों से जुड़ी अनेक पुस्तकें उपलब्ध रहेंगी, जिससे युवाओं और श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
आयोजन की एक प्रमुख विशेषता रेत से निर्मित गायत्री माता की भव्य और कलात्मक आकृति होगी। यह आकर्षक प्रस्तुति श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगी और आध्यात्मिकता तथा कला के अद्भुत संगम को दर्शाएगी। आयोजकों का मानना है कि यह कलात्मक स्वरूप लोगों को गायत्री माता के प्रति आस्था और श्रद्धा से और अधिक जोड़ने का कार्य करेगा।
आयोजकों ने सरायपाली नगर एवं आसपास के क्षेत्रवासियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस पुण्य आयोजन में सहभागी बनें। उनका कहना है कि यह महायज्ञ न केवल व्यक्तिगत जीवन में शांति और सकारात्मकता लाएगा, बल्कि समाज में एकता, सहयोग और राष्ट्र निर्माण की भावना को भी सुदृढ़ करेगा।
यह विराट 51 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ सरायपाली नगर के लिए एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजन के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना को नई दिशा प्रदान करेगा।