ट्रंप ने रूस-ईरान प्रतिबंध कानून पर किए हस्ताक्षर, भारत पर 100% तक टैरिफ का रास्ता खुला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H.R. 5334 यानी ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ पर 18 सितंबर 2026 को हस्ताक्षर कर इसे कानून बना दिया। कानून रूस और ईरान पर प्रतिबंधों का विस्तार करता है और रूस से तेल-गैस खरीदने वाले कुछ देशों के सामान पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति को देता है। हालांकि, भारत पर 100% टैरिफ अपने आप लागू नहीं हुआ है; इसके लिए आगे प्रशासनिक कार्रवाई जरूरी होगी।

Sep 19, 2026 - 10:54
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ट्रंप ने रूस-ईरान प्रतिबंध कानून पर किए हस्ताक्षर, भारत पर 100% तक टैरिफ का रास्ता खुला

UNITED NEWS OF ASIA. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों को मजबूत करने वाले H.R. 5334 यानी ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ पर 18 सितंबर 2026 को हस्ताक्षर कर दिए। व्हाइट हाउस के अनुसार इस कानून से रूस पर वैधानिक प्रतिबंध और टैरिफ संबंधी अधिकारों का विस्तार होता है, जबकि ईरान से जुड़े मौजूदा प्रतिबंधों को भी आगे बढ़ाया गया है।

इस कानून को लेकर भारत समेत रूस से ऊर्जा खरीद करने वाले देशों पर संभावित प्रभाव की चर्चा हो रही है। कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को ऐसे देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है, जो निर्धारित अवधि में रूस के कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के बड़े खरीदारों में शामिल रहे हों। हालांकि, कानून बनने के साथ भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ स्वतः लागू नहीं हुआ है। टैरिफ लगाने का फैसला और उसकी दर तय करने के लिए अमेरिकी प्रशासन को आगे कदम उठाना होगा।

कानून में राष्ट्रपति को टैरिफ के संबंध में व्यापक अधिकार दिए गए हैं। इनमें संभावित शुल्क की दर तय करना, संबंधित देशों का निर्धारण करना और कुछ परिस्थितियों में प्रतिबंधों से छूट देने जैसे अधिकार शामिल हैं। इस वजह से कानून का वास्तविक व्यापारिक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी प्रशासन इन अधिकारों का इस्तेमाल किस तरह करता है।

भारत के संदर्भ में यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस से कच्चे तेल की खरीद लंबे समय से भारत की ऊर्जा आपूर्ति का एक हिस्सा रही है। अमेरिकी प्रशासन पहले भी रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर अतिरिक्त शुल्क लगा चुका है। फरवरी 2026 में व्हाइट हाउस ने भारत से संबंधित पहले लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क को समाप्त करने का आदेश दिया था, साथ ही रूस से तेल खरीद की निगरानी जारी रखने की बात कही थी।

नए कानून का उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना और रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में अमेरिकी प्रतिबंधों की क्षमता को मजबूत करना बताया गया है। अमेरिकी प्रशासन ने कानून से जुड़े पहले के विधायी दस्तावेजों में कहा था कि नए प्रतिबंध और टैरिफ संबंधी अधिकार रूस को युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत की दिशा में प्रोत्साहित करने के साधन के रूप में इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

कानून में ईरान से जुड़े प्रतिबंधों को भी आगे बढ़ाया गया है। व्हाइट हाउस के आधिकारिक बयान के मुताबिक H.R. 5334 रूस के खिलाफ वैधानिक प्रतिबंधों, टैरिफ और अन्य निषेधों को अधिकृत करता है तथा ईरान पर मौजूदा प्रतिबंधों को विस्तार देता है।

अब निगाह इस बात पर होगी कि अमेरिकी प्रशासन नए कानून के तहत किन देशों और किन उत्पादों पर कार्रवाई करता है। भारत के लिए संभावित प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी सरकार रूस से भारतीय ऊर्जा आयात और उससे जुड़े व्यापार को किस तरह देखती है तथा राष्ट्रपति इस कानून के तहत टैरिफ संबंधी अधिकारों का इस्तेमाल करते हैं या नहीं। इसलिए फिलहाल इसे भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू होने के बजाय ऐसे टैरिफ की कानूनी संभावना खुलने के रूप में देखना अधिक सटीक है।