तारा कोल ब्लॉक नीलामी को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर उठाए सवाल
तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने राज्य सरकार और केंद्र की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने इसे आदिवासी अधिकारों, पर्यावरण और स्थानीय हितों से जोड़ते हुए नीलामी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। वहीं, केंद्रीय कोयला मंत्रालय के अनुसार तारा कोल ब्लॉक को 2023 में राज्य सरकार के अनुरोध पर नीलामी से हटाया गया था और दिसंबर 2025 में राज्य सरकार के पत्र के बाद संशोधित स्वरूप में इसे फिर नीलामी में शामिल किया गया।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर छत्तीसगढ़ में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने 18 सितंबर को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर तारा कोल ब्लॉक की नीलामी पर राज्य सरकार और केंद्र की नीतियों पर सवाल उठाए। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े इस फैसले में स्थानीय आदिवासी समुदाय, पर्यावरण और ग्राम सभाओं के अधिकारों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। शुक्ला ने सरकार से पूछा कि हसदेव-अरण्य क्षेत्र में जल, जंगल और जमीन से जुड़े स्थानीय हितों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
कांग्रेस ने तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को आदिवासी अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे से जोड़ते हुए पेसा कानून के तहत ग्राम सभाओं की भूमिका पर भी सवाल उठाया। शुक्ला ने कहा कि नीलामी से पहले स्थानीय ग्राम सभाओं की सहमति और पर्यावरण तथा जल-जंगल-जमीन से संबंधित रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए थी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि खनन गतिविधियों से प्रभावित होने वाले स्थानीय परिवारों के पुनर्वास, विस्थापन और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर सरकार की क्या योजना है। ये कांग्रेस द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं और इनका स्वतंत्र निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत किया जाना उचित नहीं है।
तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर केंद्र सरकार ने अलग पक्ष रखा है। केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने 11 सितंबर 2026 को जारी स्पष्टीकरण में कहा कि 2023 में तारा कोल ब्लॉक को हसदेव-अरण्य क्षेत्र के कोल ब्लॉकों को वाणिज्यिक नीलामी से बाहर रखने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध के बाद नीलामी प्रक्रिया से हटा दिया गया था। मंत्रालय के अनुसार, 11 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से पत्र भेजकर बताया गया कि तारा कोल ब्लॉक लेम्रू एलिफेंट कॉरिडोर के बाहर है और इसे आगामी नीलामी में शामिल किया जा सकता है। इसके बाद संशोधित सीमा के साथ ब्लॉक को 15वें दौर की वाणिज्यिक कोयला नीलामी में शामिल किया गया।
कोयला मंत्रालय के मुताबिक तारा कोल ब्लॉक के लिए नौ बोलियां प्राप्त हुईं और इसका आवंटन 37.50 प्रतिशत राजस्व हिस्सेदारी पर हुआ। मंत्रालय ने अनुमान जताया है कि इससे राज्य को सालाना 1,200 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व और 8,000 से ज्यादा रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। मंत्रालय का यह भी कहना है कि 2023 में हटाए गए मूल ब्लॉक और 2026 में नीलाम किए गए संशोधित ब्लॉक के बीच सीमा में बदलाव किया गया है।
कांग्रेस ने अपने बयान में 2023 में तारा सहित कुछ कोल ब्लॉकों को नीलामी से अलग रखने के तत्कालीन राज्य सरकार के रुख और विधानसभा में हसदेव-अरण्य से जुड़े प्रस्तावों का उल्लेख किया। वहीं केंद्र सरकार के अनुसार 2025 में राज्य सरकार के पत्र के बाद तारा ब्लॉक को दोबारा नीलामी प्रक्रिया में शामिल किया गया। इस तरह तारा कोल ब्लॉक का मामला अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ-साथ पर्यावरण, स्थानीय अधिकारों और खनन नीति से जुड़े सवालों का विषय बना हुआ है। गौरतलब है कि केवल नीलामी पूरी होने से खनन तत्काल शुरू नहीं होता; खनन योजना, पर्यावरण एवं वन स्वीकृति और अन्य वैधानिक अनुमतियां आवश्यक होती हैं।