स्मार्ट मीटर को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर उठाए सवाल

छत्तीसगढ़ कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने उपभोक्ताओं की शिकायतों, बिजली बिलों में बढ़ोतरी और स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता को लेकर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। कांग्रेस ने स्मार्ट मीटर हटाने और बढ़े बिजली बिलों के विरोध में उपभोक्ताओं से आवेदन लेने तथा बिजली कार्यालयों और मुख्यमंत्री निवास के घेराव की घोषणा की है।

Sep 19, 2026 - 10:07
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स्मार्ट मीटर को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर उठाए सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर लगाने के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने 18 सितंबर को जारी बयान में आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर को अनिवार्य किया जाना उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर से संबंधित नियमों, बिलिंग व्यवस्था और शिकायत निवारण की प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए।

कांग्रेस ने दावा किया कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद कई उपभोक्ताओं ने बिजली बिल में अप्रत्याशित बढ़ोतरी की शिकायत की है। वंदना राजपूत ने कहा कि पुराने मीटरों की तुलना में स्मार्ट मीटर की रीडिंग और बिलिंग को लेकर उपभोक्ताओं के बीच सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने सरकार से स्मार्ट मीटर की सटीकता और बिलिंग व्यवस्था को लेकर पारदर्शी जांच तथा शिकायतों के समाधान की मांग की। हालांकि, स्मार्ट मीटर से तीन से चार गुना अधिक खपत दर्ज होने का कांग्रेस का दावा स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं है।

केंद्र सरकार की उपलब्ध जानकारी के अनुसार, Revamped Distribution Sector Scheme यानी RDSS के तहत स्मार्ट मीटरिंग बिजली वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए प्रमुख घटकों में शामिल है। केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने अप्रैल 2026 में संसद में बताया कि Electricity (Rights of Consumers) Rules, 2020 के तहत नए कनेक्शन स्मार्ट प्रीपेड मीटर या प्रीपेड मीटर के माध्यम से दिए जाने का प्रावधान है और स्मार्ट मीटर से अपवाद के लिए राज्य विद्युत नियामक आयोग की मंजूरी आवश्यक होती है। साथ ही Central Electricity Authority के 2022 के संशोधित नियमों के तहत संचार नेटवर्क वाले क्षेत्रों में निर्धारित समयसीमा के अनुसार स्मार्ट मीटर उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने फरवरी 2026 में संसद में यह भी कहा था कि स्मार्ट मीटरिंग का उद्देश्य सटीक बिलिंग, मैनुअल मीटर रीडिंग से होने वाली त्रुटियों को कम करना, उपभोक्ताओं को खपत पर नजर रखने की सुविधा देना और बिजली वितरण कंपनियों की दक्षता में सुधार करना है। सरकार के अनुसार RDSS के तहत राज्यों और वितरण कंपनियों के प्रस्तावों के आधार पर बड़े पैमाने पर स्मार्ट मीटर लगाने की योजना बनाई गई है।

छत्तीसगढ़ में भी स्मार्ट और प्रीपेड मीटर से संबंधित प्रावधान राज्य के बिजली आपूर्ति नियमों में शामिल हैं। छत्तीसगढ़ स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के नियमों के अनुसार स्वीकृत श्रेणियों में आने वाले उपभोक्ता आवेदन के आधार पर, क्षेत्र में तकनीकी रूप से संभव होने पर प्रीपेड स्मार्ट मीटर के माध्यम से बिजली आपूर्ति प्राप्त कर सकते हैं।

वंदना राजपूत ने कहा कि कांग्रेस स्मार्ट मीटर हटाने और बढ़े हुए बिजली बिलों के खिलाफ उपभोक्ताओं से आवेदन भरवा रही है। उन्होंने बताया कि आवेदन एकत्र करने के बाद जिला स्तर पर बिजली कार्यालयों में प्रदर्शन और आवेदन जमा किए जाएंगे। इसके बाद पावती लेकर मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने की बात कही गई है। कांग्रेस ने इस अभियान के जरिए स्मार्ट मीटर और बिजली बिलों से जुड़ी उपभोक्ताओं की शिकायतों को सरकार तक पहुंचाने की घोषणा की है।