पोलावरम परियोजना को लेकर कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के आदिवासी हितों पर उठाए सवाल

पोलावरम परियोजना के बैकवॉटर प्रभाव को लेकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने सरकार से प्रभावित क्षेत्रों के सर्वे, पुनर्वास और मुआवजे की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने आरोप लगाया कि सुकमा और बस्तर क्षेत्र के हितों की अनदेखी की जा रही है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार छत्तीसगढ़ में पोलावरम से संभावित प्रभाव को लेकर पहले से अध्ययन हुए हैं और चार गांवों के प्रभावित होने की संभावना दर्ज की गई है, यदि सुरक्षात्मक तटबंध का विकल्प नहीं अपनाया जाता।

Sep 19, 2026 - 10:05
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पोलावरम परियोजना को लेकर कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के आदिवासी हितों पर उठाए सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l पोलावरम सिंचाई परियोजना के बैकवॉटर प्रभाव को लेकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने 18 सितंबर को जारी बयान में आरोप लगाया कि परियोजना के संभावित प्रभाव से सुकमा और बस्तर क्षेत्र के गांवों, कृषि भूमि, वन क्षेत्र और आदिवासी परिवारों के सामने डूब तथा विस्थापन का खतरा पैदा हो सकता है। कांग्रेस ने मांग की है कि छत्तीसगढ़ में संभावित प्रभाव वाले क्षेत्रों का वैज्ञानिक सर्वे कराया जाए और प्रभावित परिवारों के लिए पुनर्वास तथा मुआवजे की स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि पोलावरम परियोजना से जुड़े बैकवॉटर प्रभाव को लेकर राज्य सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ के हितों और आदिवासी समुदाय के अधिकारों की पर्याप्त चिंता नहीं की जा रही है। कांग्रेस ने यह भी कहा कि जब तक बैकवॉटर प्रभाव का सही आकलन और प्रभावित परिवारों के लिए पुनर्वास की व्यवस्था स्पष्ट नहीं होती, तब तक राज्य के संभावित डूब क्षेत्र को लेकर सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। ये कांग्रेस द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं।

उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार पोलावरम परियोजना को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के संभावित प्रभावित क्षेत्रों में बैकवॉटर प्रभाव का अध्ययन पहले किया जा चुका है। मार्च 2025 में राज्यसभा में दिए गए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के जवाब के अनुसार, 2011 की गोपालकृष्णन समिति की रिपोर्ट में संबंधित राज्यों के लिए बैकवॉटर प्रभाव का अध्ययन किया गया था। मंत्रालय के अनुसार, यदि छत्तीसगढ़ और ओडिशा द्वारा सुरक्षात्मक तटबंध और पर्याप्त जल निकासी व्यवस्था का विकल्प नहीं अपनाया जाता है, तो परियोजना पूरी होने पर छत्तीसगढ़ के चार गांवों और ओडिशा के आठ गांवों के डूबने की संभावना दर्ज की गई थी। उसी जवाब में छत्तीसगढ़ में संभावित रूप से प्रभावित लोगों की संख्या 11,766 बताई गई थी।

पोलावरम परियोजना राष्ट्रीय परियोजना है और इसका क्रियान्वयन आंध्र प्रदेश के जल संसाधन विभाग द्वारा केंद्र सरकार की ओर से किया जा रहा है। पोलावरम परियोजना प्राधिकरण के अनुसार केंद्र सरकार को परियोजना से संबंधित पर्यावरण, वन तथा पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन संबंधी आवश्यक मंजूरियों की प्रक्रिया सुनिश्चित करनी होती है। प्राधिकरण को संभावित डूब क्षेत्रों की भूमि, मुआवजे और पुनर्वास से जुड़े मामलों में संबंधित राज्यों के साथ समन्वय की जिम्मेदारी भी दी गई है।

सुरेंद्र वर्मा ने अपने बयान में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान पोलावरम के बैकवॉटर प्रभाव को लेकर उठाए गए कदमों का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि तत्कालीन सरकार ने सुकमा जिले के कोंटा क्षेत्र और आसपास के गांवों पर संभावित प्रभाव का आकलन कराने के लिए तकनीकी स्तर पर पहल की थी तथा केंद्र सरकार के समक्ष पुनर्वास, मुआवजा और सुरक्षात्मक तटबंध जैसे मुद्दे उठाए थे। कांग्रेस ने वर्तमान सरकार से इसी विषय पर अपनी नीति और अब तक की कार्रवाई सार्वजनिक करने की मांग की है।

पोलावरम परियोजना से जुड़े पुनर्वास के मुद्दे पर मार्च 2026 में संसद में रखी गई CAG रिपोर्ट ने भी आंध्र प्रदेश में पुनर्वास प्रक्रिया की धीमी प्रगति और सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण से संबंधित कमियों को दर्ज किया है। हालांकि यह रिपोर्ट मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश में परियोजना के क्रियान्वयन और पुनर्वास पर केंद्रित है। कांग्रेस का कहना है कि छत्तीसगढ़ के संभावित प्रभावित आदिवासी परिवारों के हितों की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार को सर्वे, पुनर्वास और मुआवजे की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।