TMC का नाम और चुनाव चिन्ह फ्रीज होने के खिलाफ ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं
चुनाव आयोग द्वारा ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम और पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। आयोग ने आगामी उपचुनावों के लिए ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया है। दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चिन्ह दिया गया है।
UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस के नाम और पारंपरिक चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहे विवाद के बीच ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। चुनाव आयोग ने 17 सितंबर 2026 को अंतरिम आदेश के तहत दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम और उसके आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल करने से रोक दिया था। आयोग ने यह व्यवस्था पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर चल रहे विवाद के बीच आगामी उपचुनावों को देखते हुए की है।
ममता बनर्जी की ओर से दाखिल याचिका में चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दी गई है। रिपोर्टों के मुताबिक याचिका में आयोग के आदेश पर रोक लगाने और पार्टी के मूल नाम तथा चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल की अनुमति बहाल करने की मांग की गई है। मामले में ममता बनर्जी की ओर से चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल होने के बाद अब मामले की सुनवाई और अदालत के अगले निर्देश पर नजर है।
चुनाव आयोग ने शुक्रवार को दोनों गुटों के लिए अंतरिम तौर पर अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिए। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिन्ह दिया गया है। वहीं दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि ये व्यवस्थाएं संबंधित आगामी उपचुनावों के लिए लागू होंगी।
यह विवाद पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों से भी जुड़ा है। चुनाव आयोग के अनुसार दोनों गुटों के बीच पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद के कारण मूल नाम और चिन्ह का इस्तेमाल जारी रखना चुनाव प्रक्रिया में भ्रम की स्थिति पैदा कर सकता था। आयोग ने दोनों गुटों के उम्मीदवारों के नामांकन को केवल मूल नाम और चिन्ह पर रोक के कारण अमान्य होने से बचाने के लिए अंतरिम व्यवस्था लागू की है।
इस घटनाक्रम के बीच नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हुई हैं। रिपोर्टों के अनुसार ममता बनर्जी के गुट ने अपना उम्मीदवार हटाकर कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का फैसला किया। इसके बाद प्रधान की एक पुराने मामले में गिरफ्तारी की खबर सामने आई। इस गिरफ्तारी को लेकर कांग्रेस और ममता बनर्जी के गुट ने अलग-अलग राजनीतिक आरोप लगाए हैं, जबकि मामले की कानूनी प्रक्रिया अलग विषय है।
चुनाव आयोग का मौजूदा फैसला अंतिम रूप से यह तय नहीं करता कि मूल पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह पर स्थायी अधिकार किस गुट का होगा। फिलहाल दोनों गुटों को उपचुनावों में अलग-अलग नाम और चिन्ह के साथ चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने की व्यवस्था की गई है। सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी की याचिका के बाद इस अंतरिम व्यवस्था और चुनाव आयोग के आदेश को लेकर न्यायिक स्थिति आगे स्पष्ट होगी।