अगस्त्य इंटरप्राइजेस पर जीएसटी फर्जीवाड़े का मामला, 141 करोड़ की बोगस खरीद और 23 करोड़ की आईटीसी का दावा

रायपुर में अगस्त्य इंटरप्राइजेस के नाम पर कथित जीएसटी फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। जीएसटी विभाग की जांच में कंपनी द्वारा अलग-अलग फर्मों से करोड़ों रुपये का कारोबार दिखाकर 23.43 करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने की बात सामने आई है। जांच में कुछ फर्मों के दस्तावेज, पते और किरायानामों में गड़बड़ी मिलने का दावा किया गया है। विभाग की शिकायत पर पुलिस ने संचालक अमन अग्रवाल के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

Sep 19, 2026 - 10:59
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अगस्त्य इंटरप्राइजेस पर जीएसटी फर्जीवाड़े का मामला, 141 करोड़ की बोगस खरीद और 23 करोड़ की आईटीसी का दावा

UNITED NEWS OF ASIA. रायपुर में अगस्त्य इंटरप्राइजेस के नाम पर कथित जीएसटी फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। जीएसटी विभाग की जांच के अनुसार कंपनी ने अलग-अलग फर्मों से करीब 141.74 करोड़ रुपये का कारोबार दिखाकर 23.43 करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा किया। विभागीय जांच में संबंधित फर्मों के दस्तावेजों और उनके पंजीकृत पतों का सत्यापन किया गया, जिसमें कई कंपनियों के अस्तित्व और दस्तावेजों को लेकर सवाल सामने आए। जीएसटी अधिकारियों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने लाभांडी सिग्नेचर होम निवासी और अगस्त्य इंटरप्राइजेस के संचालक अमन अग्रवाल के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जांच के दौरान अधिकारियों ने अलग-अलग फर्मों से जुड़े बिलों और कारोबार का सत्यापन किया। आरोप है कि अगस्त्य इंटरप्राइजेस ने इन फर्मों से खरीद-बिक्री दिखाकर उसके आधार पर आईटीसी का लाभ लिया। विभाग के मुताबिक कुछ मामलों में भौतिक सत्यापन के दौरान संबंधित फर्मों के पते पर वास्तविक कारोबार नहीं मिला। दस्तावेजों की जांच में भी विसंगतियां सामने आने की बात कही गई है। इनमें एक मृत व्यक्ति के नाम पर बाद की तारीख में तैयार किए गए किरायानामे का मामला भी शामिल है।

भिलाई की हुसैनी इंटरप्राइजेस से अगस्त्य इंटरप्राइजेस ने 16.61 करोड़ रुपये की बिक्री और 2.99 करोड़ रुपये की आईटीसी दर्शाई। विभागीय जांच में हुसैनी इंटरप्राइजेस के पते के लिए फूल सिंह के नाम किरायानामा प्रस्तुत किया गया था। जांच में सामने आया कि फूल सिंह की वर्ष 2010 में ही मृत्यु हो चुकी थी, जबकि संबंधित किरायानामा 21 मार्च 2025 का बताया गया। इसी तरह एक अन्य मामले में भिलाई में चूड़ी की दुकान चलाने वाले मोहम्मद इस्लाम ने अगस्त्य इंटरप्राइजेस के साथ कारोबार और बैंक खाते में लेन-देन से इनकार किया। इसके बावजूद इंटरप्राइजेस के नाम पर 11.61 करोड़ रुपये की बिक्री और 2.08 करोड़ रुपये की आईटीसी दर्शाए जाने की बात जांच में सामने आई है।

जांच में जिन फर्मों से कारोबार दिखाए जाने की जानकारी सामने आई है, उनमें अंसारी ट्रेडर्स से 30.71 करोड़ रुपये की बिक्री और 5.52 करोड़ रुपये की आईटीसी, ललित ट्रेड लिंक से 29.72 करोड़ रुपये की बिक्री और 5.17 करोड़ रुपये की आईटीसी, अगस्त इंटरप्राइजेस से 22.47 करोड़ रुपये की बिक्री और 4.04 करोड़ रुपये की आईटीसी, विनायक वेंचर्स से 17.95 करोड़ रुपये की बिक्री और 1.36 करोड़ रुपये की आईटीसी तथा महावीर इंटरप्राइजेस से 12.67 करोड़ रुपये की बिक्री और 2.27 करोड़ रुपये की आईटीसी शामिल है। इसके अलावा यूनिक इंटरप्राइजेस समेत अन्य फर्मों से भी कारोबार और आईटीसी का दावा किए जाने की जानकारी सामने आई है।

जीएसटी फर्जीवाड़े में आमतौर पर फर्जी दस्तावेजों, गलत पते या संदिग्ध किरायानामों के आधार पर कंपनियों का पंजीयन कराने और फिर बिना वास्तविक माल की खरीद-बिक्री के बिल जारी करने का आरोप सामने आता है। इन बिलों के आधार पर खरीदार आईटीसी का दावा करता है। जांच एजेंसियां पंजीकृत पते, बैंक खातों, ई-वे बिल और कारोबार से जुड़े दस्तावेजों का मिलान कर लेन-देन की वास्तविकता की जांच करती हैं। अगस्त्य इंटरप्राइजेस मामले में भी इसी तरह के दस्तावेजों और लेन-देन की जांच की जा रही है। पुलिस अब दर्ज मामले के आधार पर संबंधित दस्तावेजों, बैंक लेन-देन और अन्य रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है।