सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान की प्रतिबद्धता, मक्का-मदीना की सुरक्षा पर भी जोर
सऊदी अरब और यमन के हूती आंदोलन के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। हालांकि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि हालिया हूती हमलों के बाद समझौते के तहत किसी तत्काल सैन्य कार्रवाई पर चर्चा नहीं हुई है। समझौते का उद्देश्य तीनों देशों की सामूहिक सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करना बताया गया है।
UNITED NEWS OF ASIA. इस्लामाबाद। सऊदी अरब और यमन के हूती आंदोलन के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर अपने रुख को दोहराया है। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच 7 अगस्त 2026 को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते में तीनों देशों ने सामूहिक सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है। समझौते के अनुसार, तीनों में से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति में उसे सभी पर हमला माना जाएगा।
पाकिस्तान के सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी की ओर से सऊदी अरब के समर्थन में कड़ा बयान दिए जाने की खबरों के बीच इस समझौते की भूमिका फिर चर्चा में आई है। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने सऊदी अरब की क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई है। हालांकि, मक्का और मदीना जैसे पवित्र स्थलों की सुरक्षा से जुड़ी किसी विशेष सैन्य कार्रवाई का स्वतंत्र आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस संबंध में किए जा रहे दावों को पाकिस्तान के बयानों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब सऊदी अरब ने हूती हमलों को लेकर चिंता जताई है। हालिया रिपोर्टों में सऊदी अरब की ओर से मक्का के आसपास हूती ड्रोन हमले की कोशिश को नाकाम करने का दावा भी किया गया है, हालांकि हूती पक्ष ने इस दावे से इनकार किया है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण सऊदी अरब ने अपने सहयोगी देशों से रक्षा संबंधी सहायता और सहयोग की मांग भी की है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने 10 सितंबर को स्पष्ट किया था कि हूती हमलों के बाद मक्का रक्षा समझौते के तहत किसी तत्काल सैन्य प्रतिक्रिया पर चर्चा नहीं हुई है। मंत्रालय ने कहा था कि पाकिस्तान समझौते के प्रति प्रतिबद्ध है, लेकिन उस समय किसी सैन्य कदम पर विचार नहीं किया जा रहा था। इससे यह स्पष्ट होता है कि समझौते की मौजूदगी अपने आप में तत्काल सैन्य कार्रवाई की घोषणा नहीं है।
मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने रक्षा सहयोग, सामूहिक प्रतिरोध क्षमता और सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में काम करने पर सहमति जताई है। 31 अगस्त को इस्तांबुल में समझौते के तहत रणनीतिक राजनीतिक एवं रक्षा समिति की पहली बैठक भी हुई। इसके बाद तीनों देशों ने एक संयुक्त सचिवालय स्थापित करने का निर्णय लिया, जो सऊदी अरब में होगा और शुरुआती तीन वर्षों तक इसका नेतृत्व पाकिस्तान से आने वाले महासचिव द्वारा किया जाएगा।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने समझौते को रक्षात्मक प्रकृति का बताया है और कहा है कि इसका उद्देश्य किसी देश के खिलाफ नया सैन्य गुट बनाना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करना है। 17 सितंबर की ब्रीफिंग में भी मंत्रालय ने इसे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को मजबूत करने वाला पारस्परिक रक्षा समझौता बताया।
इस बीच सऊदी अरब और हूती आंदोलन के बीच तनाव बढ़ने से समझौते की वास्तविक भूमिका पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है। पाकिस्तान एक ओर सऊदी अरब के साथ अपने रक्षा संबंधों को मजबूत करने की बात कह रहा है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय तनाव को कम करने और कूटनीतिक समाधान की दिशा में प्रयास जारी रखने की बात भी करता रहा है।