"धरती का सीना छलनी... सरकारी खजाना खाली... आखिर किसके संरक्षण में चल रहा अवैध मुरम खनन?"

तिल्दा-नेवरा के ग्राम पंचायत कोटा में कथित अवैध मुरम खनन का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने बिना पंचायत अनुमति खनन होने, राजस्व नुकसान और प्रशासनिक जांच की मांग करते हुए दोषियों पर कार्रवाई की अपील की है। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

Jul 28, 2026 - 14:11
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"धरती का सीना छलनी... सरकारी खजाना खाली... आखिर किसके संरक्षण में चल रहा अवैध मुरम खनन?"

UNITED NEWS OF ASIA. अशोक मिश्रा, तिल्दा नेवरा l रायपुर जिले के तिल्दा-नेवरा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत कोटा में कथित अवैध मुरम खनन का मामला सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र में भारी मशीनों की सहायता से लगातार मुरम का उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, खनिज विभाग और राजस्व विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।

स्थानीय लोगों के अनुसार खनन स्थल पर दो हाइवा वाहन (क्रमांक CG 04 MM 9929) तथा एक जेसीबी मशीन (क्रमांक CG 04 PJ 7552) के माध्यम से मुरम का उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि क्षेत्र में लगातार मशीनें संचालित हो रही हैं, तो संबंधित विभागों की ओर से अब तक कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है।

ग्रामीणों का दावा है कि इस खनन कार्य के संबंध में ग्राम पंचायत से कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया है। पंचायत प्रतिनिधियों के अनुसार उन्हें इस संबंध में किसी प्रकार की आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई। ऐसे में ग्रामीण यह जानना चाहते हैं कि यदि पंचायत स्तर पर अनुमति नहीं है, तो खनन कार्य किस आधार पर संचालित किया जा रहा है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बिना वैध अनुमति के बड़े पैमाने पर मुरम निकाले जाने से शासन को राजस्व की हानि हो रही है। साथ ही अनियंत्रित खनन से पर्यावरण और स्थानीय भू-भाग पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो अवैध खनन का दायरा और बढ़ सकता है।

क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि कथित रूप से यह पूरा कार्य एक स्थानीय राजनीतिक संरक्षण में संचालित हो रहा है। हालांकि, इस संबंध में किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और न ही संबंधित पक्ष का बयान सामने आया है। इसलिए इन आरोपों की स्वतंत्र जांच होना आवश्यक माना जा रहा है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि खनन स्थल का संयुक्त निरीक्षण कराया जाए, राजस्व एवं खनिज विभाग द्वारा पैमाइश कराई जाए तथा यदि अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित मशीनों और वाहनों को जब्त कर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने की भी मांग की गई है।

फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग शिकायतों की जांच कर क्या कार्रवाई करते हैं और क्या कथित अवैध खनन के आरोपों की पुष्टि होती है या नहीं।